क्या है बेअदबी विरोधी कानून? पंजाब की भगवंत मान कैबिनेट ने दी मंजूरी, ₹20 लाख जुर्माना संग जेल या उम्रकैद
Bhagwant Mann cabinet approved drafted strict anti-sacrilege law: पंजाब की आम आदमी पार्टी की भगवंत मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने धर्म और धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ कानून को मंजूरी दे दी है। 'The Punjab Prevention of Offences Against Holy Scripture(s) Act, 2025' के नाम से बनाए गए इस कानून को पंजाब में लागू करने का उद्देश्य राज्य में धार्मिक सद्भाव बनाए रखना है। इस कानून के तहत सांप्रदायिक दंगों को भड़काने वालों के खिलाफ भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के लिए इस कानून के तहत बड़ी ही कड़ी सजा का प्रवाधान मान सरकार ने किया है। दोषी पाए जाने पर इस कानून के तहत दोषी को 10 साल की जेल की सजा या उम्रकैद भी हो सकती है। साथ भारी-भरकम जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

बता दें, 28 जून 2025 को भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि उनकी सरकार बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा के प्रावधान वाला एक कानून लेकर आएगी। उन्होंने कहा था "बेअदबी को लेकर हम इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इसके खिलाफ एक कानून बनाया जाएगा, लेकिन इसके लिए हम हितधारकों, धार्मिक संस्थाओं से भी बातचीत करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम मसौदे के लिए उन्हें समय चाहिए। वहीं अब पंजाब सरकार की कैबिनेट ने इस कानून को मंजूरी दे दी है।
10 साल की सजा या उम्रकैद का है प्रवाधान
धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी कानून का जो सरकार द्वारा ड्राफ्ट तैयार किया गया है उसमें स्पष्ठ लिखा है किसी भी धर्म या धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वाले दोषी को कम से कम 10 साल की जेल की सजा का प्रवाधान है और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रवाधान किया गया है। वहीं पवित्र ग्रंथ की बेअदबी या धार्मिक ग्रंथों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश अगर कोई करता है तो उसके लिए 3 से 5 साल तक की जेल का प्रावधान है।
माता-पिता या अभिभावक भी आरोपी माना जाएगा
पंजाब सरकार द्वारा पवित्र ग्रंथ की बेअदबी और धार्मिक ग्रंथों को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, अगर धर्म या धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी करने वाला आरोपी अगर नाबालिग है तो उसके माता-पिता को भी संबंधित मामले में शामिल किया जाएगा। जानबूझकर या किसी अन्य कारण से अपने नाबालिग बच्चे या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को नियंत्रित करने में माता-पिता या अभिभावक विफल रहते हैं, और वह बेअदबी करता है, तो माता-पिता या अभिभावकों को भी आरोपी माना जाएगा।
सांप्रदायिक दंगा भड़काने पर 10 से 20 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल
पंजाब सरकार के इस कानून के ड्राफ्ट में ये भी लिखा गया है कि ऐसा अपराध सांप्रदायिक दंगों को भड़काता है, जिससे जान-माल का नुकसान होता है, तो दोषी को 20 साल से उम्रकैद की सजा हो सकती है। जेल की सजा के साथ 10 से 20 लाख तक जुर्माना भी वसूला जाएगा। जुर्माना न भरने की स्थिति में पैरोल या फरलो का कोई प्रावधान नहीं है।
धर्म या धार्मिंक ग्रंथों के खिलाफ साजिश रचने वालों को भी मिलेगी सजा
धर्म या धार्मिंक ग्रंथों के खिलाफ साजिश रचने वालों या इसे उकसाने वालों पर इस कानून के तहत केस चलाया जाएगा। यदि कोई धार्मिक पूजा या धार्मिक आयोजन या समारोह में बाधा डालता है, या उन्हें परेशान किया जाता है तो ऐसे लोगों के लिए इस कानून में सजा का प्रवाधान किया गया है।
दोषी पंडित, मौलवी और प्रबंधक को भी मिलेगी सख्त सजा
सरकार के इस ड्राफ्ट में लिखा है, यदि कोई ग्रंथी, पाठी सिंह, सेवादार, रागी, ढाडी, प्रबंधक, पंडित, पुरोहित, मौलवी या पादरी, जिन्हें अपने-अपने पवित्र धर्मग्रंथों से संबंधित धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया है, इस कानून के तहत दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम सजा दी जाएगी।












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