पंजाब-हरियाणा जल विवाद पर हाई कोर्ट सख्त, पंजाब सरकार के खिलाफ अमानना नोटिस की चेतावनी, जानें पूरा मामला
Punjab Haryana Water Issue: पंजाब-हरियाणा जल विवाद पर हरियाणा हाईकोर्ट सख्त हो गया है इसके साथ ही पंजाब सरकार को अवमानना का नोटिस जारी करने की चेतावनी दी है। पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा-नंगल डैम से पानी की आपूर्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब न्यायिक मोड़ पर पहुंच गया है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह पंजाब सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती है, क्योंकि राज्य ने भाखड़ा डैम से हरियाणा को 4,500 क्यूसिक पानी छोड़ने में बाधा डाली है।

Punjab Haryana Water Issue: कैसे बढ़ा विवाद?
गुरुवार को नंगल डैम पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी को गेस्ट हाउस में बंद कर दिया गया और उन्हें हरियाणा को पानी छोड़ने से रोक दिया गया। इस पूरी घटना के पीछे आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस थे।
उन्होंने सतलुज सदन के बाहर धरना दिया और मुख्य द्वार को ताला लगाकर त्रिपाठी को बाहर निकलने नहीं दिया। बाद में पुलिस की मदद से उन्हें वहां से निकाला गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इस घटनास्थल पर पहुंचे और धरने का समर्थन किया। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को "अविश्वसनीय" करार दिया।
What is the Bhakra-Nangal dispute? भाखड़ा-नंगल विवाद क्या है?
भाखड़ा-नंगल परियोजना आज़ादी के बाद की पहली बड़ी नदी परियोजनाओं में से एक है। इसमें सतलुज नदी पर हिमाचल प्रदेश में स्थित भाखड़ा डैम और पंजाब में नंगल डैम शामिल हैं। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) इन डैमों से जल का वितरण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच करता है।
हर वर्ष की शुरुआत में, बीबीएमबी राज्यों को जल आवंटन तय करता है। इस साल के लिए पंजाब को 5.512 मिलियन एकड़ फीट (MAF), हरियाणा को 2.987 MAF, और राजस्थान को 3.318 MAF जल आवंटित किया गया है।
पंजाब का दावा है कि हरियाणा ने पहले ही 3.110 MAF - यानी अपने हिस्से से 104% पानी ले लिया है। साथ ही, हिमालय क्षेत्र में कम बर्फबारी के कारण भाखड़ा, पोंग और रंजीत सागर डैम में जल स्तर पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
Haryana Water Issue: केंद्र ने सुझाया था पानी उधार देने का विकल्प
2 मई को BBMB की बैठक में केंद्र सरकार के गृह सचिव ने पंजाब और हरियाणा को आपसी सहमति से मुद्दा सुलझाने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि हरियाणा 4,500 क्यूसिक पानी पंजाब से उधार ले और मानसून में इसे वापस करे। लेकिन पंजाब ने इस बैठक को 'अवैध' करार देते हुए इसका बहिष्कार किया, यह कहते हुए कि BBMB केवल सात दिन की पूर्व सूचना देकर बैठक बुला सकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब पहले ही हरियाणा को मानवीय आधार पर 4,000 क्यूसिक पानी दे रहा है, जबकि उसकी पीने के पानी की आवश्यकता 1,700 क्यूसिक ही है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा को पिछले दो वर्षों से अवगत कराया गया है कि वह अपनी निर्धारित सीमा से अधिक पानी ले रहा है।
Punjab Haryana Water Issue पर हाईकोर्ट की फटकार
पूर्व एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि 6 मई को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह BBMB की 2 मई की बैठक के निर्णयों का पालन करे। उन्होंने कहा कि बैठक में जल आवंटन का निर्णय नहीं हुआ था, बल्कि यह कानून-व्यवस्था से संबंधित थी।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार ने BBMB के कार्यों में हस्तक्षेप किया है, जो पहले दिए गए न्यायिक आदेश का उल्लंघन है। चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस सुमीत गोयल की खंडपीठ ने कहा कि पंजाब के मुख्य सचिव के एपी सिन्हा और डीजीपी गौरव यादव को नोटिस जारी किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह आदेश स्थगित या निरस्त नहीं किया जाता, तब तक इसका पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा, "हम आपके अधिकारियों को जेल नहीं भेज रहे, हम केवल नोटिस जारी कर रहे हैं।"
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पंजाब सरकार न्यायिक आदेश का पालन करने का आश्वासन देती है, तो वह सोमवार तक नोटिस पर रोक लगाएगी। इस विवाद की अगली कानूनी सुनवाई अब सोमवार को होगी, जो यह तय करेगी कि पंजाब सरकार पर अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं।












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