पंजाब: सिद्धू से 'तनातनी' के बीच अब खास 'मिशन' पर जुटे अमरिंदर, कांग्रेस को मिल सकता है डबल फ़ायदा

पंजाब की कांग्रेसी गलियारों में हर पल कुछ न कुछ नया हो रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्‌ठल के घर पहुंचे और उनके साथ चाय पर चर्चा भी की।

चंडीगढ़, अगस्त 28, 2021। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर काफ़ी सक्रिय हो चुके हैं वह अपनी तरफ़ से छोटी सी भूल होना नहीं देना चाह रहे हैं शायद इसलिए ही वह लगातार वह पार्टी के नेताओं से कभी चाय पर चर्चा कर रहे हैं तो कभी डिनर पर चर्चा हो रही है। विरोधी खेमे के ख़िलाफ़ पार्टी हाईकमान का खुला समर्थन मिलने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके समर्थकों में नई उमंग जगी है साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थकों की भी तादाद बढ़ने लगी है।

amrinder singh

कैप्टन ने की चाय पर चर्चा
पंजाब की कांग्रेसी गलियारों में हर पल कुछ न कुछ नया हो रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्‌ठल के घर पहुंचे और उनके साथ चाय पर चर्चा भी की। ग़ौरतलब है कि जब कैप्टन अमरिंदर सिंह पिछली बार मुख्यमंत्री थे तो उनका राजिंदर कौर भट्‌ठल के साथ छत्तीस का आंकड़ा था। उस वक्त भट्‌ठल ने विधायकों को साथ लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की कोशिश तक की थी। फिलहाल पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के साथ चल रहे मतभेद के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में अपनी पकड़ बनाने के लिए राजिंदर कौर भट्‌ठल के साथ भी सियासी दूरियां कम करने की कोशिश की है।

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    भट्ठल ने दी थी कैप्टन की कुर्सी को चुनौती
    राजिंदर कौर भट्ठल का 2002 से 2007 तक पंजाब के सीएस कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ छत्तीस का आंकड़ा था। गौरतलब है कि 1996 से 97 तक राजिंदर कौर भट्ठल सीएम रहीं थी। हालांकि इसके अगले विधनासभा चुनाव में अकाली दल ने जीत दर्ज की थी और प्रकाश सिंह बादल 1997 से 2002 तक पंजाब के सीएम रहे थे। इसके बाद राजिंदर कौर भट्ठल के हाथों में कांग्रेस की कमान आ गई थी। जब कांग्रेस की 2002 में सरकार बनी तो कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए। जिसका राजिंदर कौर भट्‌ठल ने जोरदार विरोध करते हुए करीब 2 साल बाद उन्होंने 2004 में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की कुर्सी को चुनौती दी। राजिंदर कौर 40 विधायकों के समर्थन के साथ कांग्रेस हाईकमान तक पहुंची थी, लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की कुर्सी को हिलाने में कामयाब नहीं हो पाई थी। राजिंदर कौर भट्ठल को डिप्टी सीएम बनाने के बाद मामला ख़त्म हो गया।

    सिद्धू ने भी दिखाई थी भट्ठल से क़रीबी
    राजिंदर कौर भट्‌ठल से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने भी करीबी दिखाई थी । प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वो भट्‌ठल से मिलने उनके घर गए थे। इसके बाद ताजपोशी के दौरान स्टेज पर उनके नवजोत सिहं सिद्धू ने भट्ठल के पैर भी छुए थे। ताजपोशी समारोह के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को इग्नोर किया था। ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब कैबिनेट की बैठक के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी के आवास आवास पर डिनर पार्टी में गए थे। वहां कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा 58 विधायक और आठ कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे। वहीं सियासी गलियारों में यह भी हलचल है कि खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह के यहां डिनर पार्टी को पार्टी के बहाने कैप्टन ने शक्ति प्रदर्शन कर विरोधी खेमे को अपनी ताक़त दिखाई है। राणा सोढी के आवास पर हुई पार्टी को इसलिए भी शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा सकता है क्योंकि सीएम कैप्टन अमरिंदर के सबसे करीबी नेताओं में से एक राणा सोढ़ी भी माने जाते हैं । खेल मंत्री के घर हुई इस डिनर पार्टी ने पंजाब के सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    विरोधी खेमे ने की थी हाईकमान से शिकायत
    आपको बता दें कि विरोधी खेमे में शामिल तीन मंत्री हाईकमान से कैप्टन की शिकायत करने दिल्ली गए थे। तृप्त बाजवा के आवास पर विरोधी खेमे ने जो संख्या बल दिखाया था, उसके हिसाब से 60 विधायक कैप्टन के साथ थे लेकिन राणा सोढी के यहां डिनर पार्टी में यह तादाद बढ़कर 66 हो गई है। यानी विरोधी खेमे के लिए अब कैप्टन का मुकाबला किसी भी तरह से मुमकिन नहीं रह गया है। वहीं हाईकमान ने भी कैप्टन को समर्थन करते हुए कांग्रेस में बदसाव की अटकलों पर से पर्दा हटा दिया है, जिसके बाद से कैप्टन अमरिंदर सिंह के खेमे में नया जोश भर गया है। अमरिंदर के इस कदम से जहां कांग्रेस में एकजुटता का संदेश जाएगा, वहीं कैडर के बीच अमरिंदर भी मजबूत होंगे और इस तरह पार्टी को दोहरा फायदा मिल सकता है

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