Rail Roko: पंजाब में रेलवे ट्रैक पर क्यों पहुंचे उद्योगपति? बोले- हमारे पास और कोई विकल्प नहीं, जानिए वजह
लुधियाना-दिल्ली रेल लाइन पर पंजाब के उद्योगपति पहुंचे। उन्होंने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि आमतौर पर उद्योगपति विरोध का सहारा नहीं लेते, लेकिन सरकार ने उन्हें मजबूर कर दिया है। अगर उनकी मांगे पूरी ना हुईं तो विरोध और तेज होगा।
लोकसभा चुनाव से पहले किसानों के बाद अब उद्योगपतियों ने विरोध शुरू किया है। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज ने वित्त अधिनियम 2023 में आईटी कानून 43बी (एच) के तहत केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए 45-दिवसीय भुगतान नियम के विरोध में विरोध प्रदर्शन 'रेल रोको' के जरिए केंद्र को चेतावनी दी। फेडरेशन ऑफ ऑल टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज ने पंजाब के अध्यक्ष तरुण जैन बावा ने कहा कि सरकार अगर उद्योगपतियों की मांगें नहीं मानती तो विरोध और तेज होगा।

पंजाब के उद्योगपतियों ने केंद्र के 45 दिवसीय भुगतान नियम का विरोध कर रहे हैं। वे लुधियाना-दिल्ली रेल लाइन पर 'रेल रोको' विरोध के तहत पहुंचे। फेडरेशन ऑफ ऑल टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज ने कहा है अगर सरकार के रुख के रुख में जब तक बदल जाता तब तक विरोध जारी रहेगा। फेडरेशन के एक अन्य सदस्य संजू धीर ने मीडिया से कहा, "आम तौर पर, उद्योगपति इस तरह के विरोध का सहारा नहीं लेते हैं, लेकिन अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हमारी मांग को अनसुना कर दिया गया। यह 45-दिवसीय भुगतान नीति हानिकारक है, और सरकार को हमारे व्यापारिक लेनदेन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार के तानाशाही रवैये से निराश होकर हम 1 मार्च को रेल रोको प्रदर्शन कर रहे हैं। शायद यह खुद की बात रखने का एकमात्र तरीका है।"
क्यों हो रहा उद्योगपतियों का विरोध
केंद्र सरकार ने बीते साल आयकर कानून में 43B(H) जोड़ा था, यह धारा 1 अप्रैल 2023 से लागू हो चुकी है, जिसके अंतर्गत मीडिया, स्मॉल और माइक्रो एंटरप्राइजेज आते हैं। धारा के मुताबिक, MSME के तहत आने वाले सप्लायर की कोई डील होती है तो उसकी पेमेंट 45 दिन के अंदर करनी होगी। ऐसा न करने पर इसे इनकम माना जाएगा और इस पर टैक्स देना होगा। अगर 45 दिन के अंदर पेमेंट कर दिया गया है तो असेसमेंट ईयर 2024-25 में इन्हें क्लेम कर टैक्स बचाया जा सकता है।












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