पंजाब चुनाव में किस तरह के बन रहे हैं समीकरण, क्या दो दल ही हैं रेस में ? समझिए सियासी गणित
पंजाब में चुनाव की तारीख का एलान होते ही सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। सर्वे के मुताबिक राज्य में दो ही सियासी पार्टियां चुनावी रण में आगे दिख रही है।
चंजीगढ़, 11 जनवरी 2022। पंजाब में चुनाव की तारीख का एलान होते ही सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। सर्वे के मुताबिक राज्य में दो ही सियासी पार्टियां चुनावी रण में आगे दिख रही है। आम आदमी पार्टी को 40 फ़ीसदी और कांग्रेस को 36 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है। वहीं शिरोमणि अकाली दल और बसपा गठबंधन को 18 फीसदी वोट मिल सकता है। 6 फीसदी वोट पर भारतीय जनता पार्टी और उसकी गठबंधन के साथी सिमट सकते हैं। आम आदम पार्टी को विनिंग ज़ोन में आने के बावजूद बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। इसके पीछे की वजह क्षेत्रीय समीकरण मानी जा रही है, क्योंकि आम आदमी पार्टी अभी पंजाब में स्थानीय पार्टी के तौर पर अपनी छवि नहीं बना सकी है। कांग्रेस ने दलित सीएम बनाकर मास्टर कार्ड पहले ही खेल दिया है। यही वजह है कि शिअद-बसपा गठबंधन के वोट बैंक में कांग्रेस सेंधमारी कर सकती है।

किस तरह के बन रहे सियासी समीकरण ?
पंजाब के चुनावी रण में राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवारों का चयन भी अहम किरदार निभा सकता है। कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है निर्दलीय उम्मीदवार की सियासी दलों के उम्मीदवार से ज़्यादा अच्छी पकड़ होती है। जिस तरह से पंजाब में सियासी समीकरण बन रहे हैं उसे देखते हुए मतदाता भी कन्फ्यूज़ हो रहे हैं कि किस पार्टी के पक्ष में वोट डालें। इसलिए सियासी दलों के लिए सही उम्मीदवारों का चयन बहुत ही खास मायने रख रहा है। शिरोमणि अकाली दल का काफ़ी वोट बिक्रम मजीठीया ड्रग्स केस मामले की वजह से भी खिसक गया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी और उसकी गठबंधन साथी की बात की जाए तो किसान आंदोलन की वजह से भाजपा विरोधी लहर थी लेकिन कैप्टन ने गठबंधन कर डैमेज कंट्रोल किया था। अब दोबारा से फिरोजपुर मामले की वजह भाजपा का जनाधार खिसकने लगा है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया डैमेज कंट्रोल
कृषि कानूनों की वापसी और करतारपुर बॉर्डर खुलवा कर भारतीय जनता पार्टी दोबारा से पंजाब में पकड़ मज़बूत कर रही थी। भाजपा विरोधी लहर को कुछ हद तक कैप्टन ने भी कम किया लेकिन फिरोजपुर रैली के बाद फिर से भाजपा सियासी दौड़ में पीछे हो गई है। पंजाब के सियासी रण में अब दो ही पार्टी नज़र आ रही है, जिसके पक्ष में ज़्यादातर मतदाताओं का झुकाव है। एक आम आदमी पार्टी और दूसरी कांग्रेस पार्टी है जो चुनावी रेस में दिख रही है। सर्वे की बात की जाए तो 2022 के चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस) को बतौर सीएम उम्मीदवार 29 फ़ीसद जनता पसंद कर रही है। नवजोत सिंह सिद्धू (कांग्रेस) को 6 फ़ीसद जनता पसंद कर रही है। अरविंद केजरीवाल (आप) को 17 फीसदी मतदाता और सुखबीर सिंह बादल (शिअद) को 15 फीसदी वोटर पंसद कर रहे हैं। वहीं भगवंत मान (आप) को 23 फीसद मतदाता बतौर सीएम उम्मीदवार पसंद कर रहे हैं। 10 फीसदी मतदाता अन्य उम्मीदवारों को पसंद कर रहे हैं।
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डी-फ़ैक्टर की चुनाव में अहम भूमिका
पंजाब में डी फ़ैक्टर किसी भी सियासी दल को जीत दिलाने में अहम किरदार निभाता है क्योंकि दलित आबादी दोआबा और माझा क्षेत्रों में कुल 48 सीटें हैं। वहीं क़ायस लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस इन दो क्षेत्रों में क़रीब 30 सीटें निकाल सकती। वहीं आम आदमी पार्टी मालवा क्षेत्र में अपनी सियासी पकड़ काफ़ी मज़बूत कर रही है। 117 विधानसभा सीटों में दोआबा औऱ माझा मिलाकर 48 सीटें। वहीं मालवा क्षेत्र और अन्य विधानसभा क्षेत्रों के मिलाकर 69 सीटें बच रही है। 69 सीटों में क़रीब मालवा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी 40 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। इस तरह 70 सीटों पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिल सकती है। वहीं 47 सीटें ऐसी हैं जहां पंजाब के सभी सियासी दल मिला जुला के जीत दर्ज कर सकते हैं। इसलिए सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो चुकी है कि पंजाब के चुनावी रण में मुकाबला सिर्फ़ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में है। बाकि दूसरी राजनीतिक पार्टियों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं होने वाला है।
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