पंजाब के राज्यपाल पर बरसे राघव चड्ढा बोले- वो भाजपा के एजेंट हैं, प्रदेश में कांग्रेस-BJP मिल गए हैं

नई दिल्ली, 22 सितंबर। पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार और राज्यपाल के बीच ठन गई है। दरअसल आम आदमी पार्टी की सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया था, जिसे पहले राज्यपाल ने अनुमति दे दी थी, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया है। राज्यपाल के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और सांसद राघव चड्ढा ने तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह फैसला असंवैधानिक है, वह अपने ही फैसले से पलट नहीं सकते हैं, यह संविधान के खिलाफ है, हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

राज्यपाल कैबिनेट के फैसले से बाध्य

राज्यपाल कैबिनेट के फैसले से बाध्य

राघव चड्ढा ने कहा कि भारत का संविधान और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले कहते हैं कि राज्यपाल मंत्रिमंडल के फैसले से बाध्य हैं, वह पोस्टमास्टर का काम करते हैं। वह अपना विवेक लगाकर इसे पलट नहीं सकते हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यपाल ने जो रोक लगाई है, वह गैर संवैधानिक है। सदन बुलाने का अधिकार सरकार का नहीं होता तो राज्यपाल क्यों इसकी अनुमति देते। वर्ष 1951 में भी उस समय के मुख्यमंत्री विश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। तमिलनाडु में भी सी राजागोपलाचारी भी 1952 में विश्वास प्रस्ताव ला चुके हैं। राज्यपाल सिर्फ नाममात्र के शीर्ष होते हैं. वह सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा पास किए गए फैसलों से बाध्य होते हैं। अपना विवेक लगाकर राज्यपाल कैबिनेट के फैसले को रोक नहीं सकते हैं। वह एक पोस्टमास्टर की तरह काम करते हैं।

25-25 करोड़ में हमारे विधायक खरीदने की कोशिश

25-25 करोड़ में हमारे विधायक खरीदने की कोशिश

राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब में ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है। यहां 25-25 करोड़ रुपए देकर हमारे विधायकों को भाजपा खरीदने की कोशिश हो रही थी। आज राज्यपाल इस ऑपरेशन लोटस का हिस्सा बन गए हैं। भाजपा के इशारे पर अब उन्होंने अपनी ही दी हुई अनुमति को वापस ले लिया है। अगर आपने अनुमति दे दी थी तो आपने इसे वापस कैसे ले लिया। अनुमति को वापस लेने का राज्यपाल के पास संवैधानिक अधिकार नहीं है। एक बार इसकी अनुमति देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष के ऊपर है कि वह कब इस सदन को बुलाए। लेकिन राज्यपाल के कृत्य से साफ है कि वह भाजपा के ऑपरेशन लोटस का हिस्सा हैं।

कांग्रेस-भाजपा आपस में मिल गए

कांग्रेस-भाजपा आपस में मिल गए

आप नेता ने कहा कि आज भाजपा के इशारे पर राज्यपाल ने जो काम किया है वह भाजपा के ऑपरेशन लोटस मिशन को मजबूत करने की कोशिश है। भाजपा अभी नंबर नहीं जुटा पाई है, यही वजह है कि वह चाहती है कि अभी विधानसभा का सत्र ना बुलाया जाए। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि इस पूरे ऑपरेशन लोटस के जरिए आप की सरकार को रोकने के लिए भाजपा और कांग्रेस साथ आ गए हैं। कांग्रेस और भाजपा ने साथ मिकर राज्यपाल के इस फैसले का समर्थन किया और इसका जश्न मनाया। दोनों दल साथ आ गए हैं। कांग्रेस खुद ऑपरेशन लोटस का शिकार रही है, लेकिन बावजूद इसके वह पंजाब में ऑपरेशन लोटस के खिलाफ नहीं बल्कि पक्ष में खड़ी है।

राज्यपाल भाजपा के एजेंट

राज्यपाल भाजपा के एजेंट

राज्यपाल भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आप की सरकार है, हम सड़क पर लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ेंगे। भगवंत मान की सरकार ने फैसला लिया है कि राज्यपाल ने जो रोक लगाई है, हम उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और न्याय की गुहार लगाएंगे। हम कहेंगे कि राज्यपाल के पास कोई भी संवैधानिक शक्ति नहीं है जिसके तहत वह सत्र पर रोक लगा सकें। मुख्यमंत्री ने फैसला लिया है कि 27 सितंबर को हम फिर से सत्र को बुलाएंगे। हमने इसके लिए कैबिनेट का प्रस्ताव पास किया है, इसे राज्यपाल के पास भेजा है। हम सड़क से लेकर संसद तक राज्यपाल द्वारा संघीय ढांचे पर जो चोट पहुंचाई जा रही है उसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

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