पंजाब: चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस को लग सकता है झटका, जानिए क्या है एक्सपर्ट का मानना ?
पंजाब के चुनावी नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस में फिर से गुटबाज़ी को हवा मिल गई है। पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।
चंडीगढ़, 25 फरवरी 2022। पंजाब के चुनावी नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस में फिर से गुटबाज़ी को हवा मिल गई है। पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पर सांसद गुरजीत सिंह औजला ने निशाना साधते हुए कहा कि सिद्धू को बोलने के तरीक़े और विधानसभा क्षेत्र में एक्टिव नहीं होने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर सिद्धू गुट के नेताओं ने भी कांग्रेस के कई नेताओं पर आरोप लगाया है। सुरिंदर डल्ला ( सिद्धू के मीडिया सलाहकार) ने कहा कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को उनके पार्टी के ही राज्य मंत्री और सांसदों ने हराने के लिए काम किया है। कांग्रेस में अनुशासन की बहुत ज्यादा ही कमी है। इसके साथ ही चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस को झटका लगने के भी संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस में फिर शुरू हुई गुटबाज़ी
पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच खडूर साहिब से कांग्रेस सांसद जसबीर डिंपा भी पार्टी को बड़ा झटका दे सकते हैं। आपको बता दें कि सांसद जसबीर डिंपा ने अपने बेटे को पार्टी से टिकट दिलवाने की बहुत वक़ालत की थी लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। जिसके बाद डिंपा के बेटे ने शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया था। इन दिनों कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह डिंपा की भी नज़दीकियां शिरोमणि अकाली दल के साथ बढ़ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ़ राणआ गुरजीत सिंह (विधायक, कपूरथला) ने भी कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने की वजह से अपने बेटे इंदरप्रताप सिंह को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सुलतानपुर लोधी से मैदान में उतार दिया था। इस वजह से उनकी सुखपाल खैरा ( विधायक, भुलत्थ) और नवजेत सिंह चीमा (विधायक, सुलतानपुर लोधी) के साथ मतभेद जारी है। सूत्रों की मानें तो चुनाव के नतीजे के बाद राणा गुरजीत सिंह को नवतेज सिंह चीमा घेर सकते हैं।

सीएम चन्नी की बढ़ सकती है मुश्किलें
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई डॉक्टर मनोहर सिंह भी बस्सी पठानां से कांग्रेस की टिकट पर चुनावी बिगुल फूंकना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। वहां से मौजूदा कांग्रेस के मौजूदा विधायक गुरप्रीत सिंह जीपी को टिकट दिया गया था, वह नवजोत सिंह सिद्धू के क़रीबी माने जाते हैं। इसी बात से नाराज़ होकर डॉक्टर मनोहर सिंह (चन्नी के भाई) ने बस्सी पठानां से बतौर आजाद उम्मीदवार पर्चा दाख़िल कर चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम के बाद बस्सी पठाना से डॉ. मनोहर के समर्थक सीएम चन्नी को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। पंजाब कांग्रेस के नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए यही लग रहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी को फिर से हवा मिल गई है।

कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
पंजाब कांग्रेस में मतदान के बाद पैदा हुई स्थिती पर सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरह चुनाव के नतीजे से पहले ही कांग्रेस में गुटबाज़ी फिर से हावी हो गई है। इसका नतीज चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। इसका सीधा फ़ायदा विपक्षी दलों को हो सकता है, चूंकि आम आदमी पार्टी का पंजाब की सियासत में ज़्यादा तजुर्बा नहीं रहा है। इस वजह से वह कांग्रेस के बाग़ी हो रहे विधायकों को अपने पाले में करने में असमर्थ हो सकती है। लेकिन कांग्रेस की गुटबाज़ी का सीधा फ़ायाद शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी उठा सकती है। शिअद-भाजपा के गठबंधन की संभावनाएं भी तेज़ हो रही हैं। भाजपा में कई ऐसे रणनीतिकार बैठे हुए हैं जो बहुत ही आसानी से हारी हुई बाज़ी को भी जीत में तब्दील कर सकते हैं। फिलहाल चुनाव परिणाम के बाद ही स्थिती साफ़ हो पाएगी कि पंजाब में सत्ता की चाभी किसके हाथ लगती है।
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