पंजाब विधानसभा में AAP सरकार ने MNREGA में बदलाव के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
पंजाब विधानसभा ने आज अपने विशेष सत्र की शुरुआत में गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने सदन का नेतृत्व करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन भेंट किए।
इसके साथ ही 2025 को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलावों के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया गया। राज्य सरकार ने इन परिवर्तनों को दलित और गरीब विरोधी करार देते हुए इन्हें ग्रामीण रोजगार व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला बताया। ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने विधानसभा के विशेष सत्र में यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया कि मनरेगा में हुए ये बदलाव विशेष रूप से दलित समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने जोर देकर कहा, "यह योजना दलितों की आजीविका और आत्मसम्मान से जुड़ी हुई है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन संशोधनों के माध्यम से योजना को कमजोर करने और इसे पूरी तरह खत्म करने की एक सोची-समझी रणनीति अपनाई जा रही है।
पंजाब सरकार ने इस प्रस्ताव के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी सीधा और तीखा हमला बोला। सरकार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने दलित परिवारों से वोट मांगने का अपना नैतिक अधिकार खो दिया है। उनका कहना है कि पार्टी को दलितों की रोजी-रोटी और उनके रोजगार की कोई वास्तविक चिंता नहीं है, बल्कि यह कदम उनके सम्मान और अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि मनरेगा पर यह हमला केवल एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि दलितों की इज्जत और अधिकारों पर सीधा प्रहार है। इसी संदर्भ में, शिरोमणि अकाली दल की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। इस पूरे मुद्दे पर गहन चर्चा के लिए पंजाब सरकार ने 30 दिसंबर को विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया था।
यह महत्वपूर्ण सत्र केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर 'विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM-G' किए जाने के फैसले के बाद बुलाया गया। राज्य सरकार ने मनरेगा के इस नाम परिवर्तन को भी गरीब विरोधी और जनविरोधी कदम करार दिया है, जिससे ग्रामीण आबादी की मूलभूत ज़रूरतों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
सत्र के दौरान राज्य सरकार ने केंद्र से मनरेगा एक्ट में हुए सभी बदलावों को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की। केंद्र के खिलाफ एक औपचारिक प्रस्ताव भी पेश किया गया। हालांकि, इस विशेष सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं रखा गया था, फिर भी सरकार ने स्पष्ट किया कि वह गरीबों और दलितों के अधिकारों से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी।












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