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नेपाल में चीन के बनाए हवाई अड्डे पर नहीं गए नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी और शेर बहादुर देउबा

नई दिल्ली, 17 मई। नेपाल ने सोमवार को जब चीन द्वारा बनाए गए एक हवाई अड्डे का उद्घाटन किया, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां से कुछ ही किलोमीटर दूर थे. बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर लुंबिनी में यह नया एयरपोर्ट पर्यटन को बढ़ावा देने की उम्मीद में शुरू किया गया है, जिसे सोमवार को नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने राष्ट्र को समर्पित किया. भारतीय प्रधानमंत्री भी बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर ही लुंबिनी में थे लेकिन उन्होंने एयरपोर्ट के रास्ते अपने आयोजन स्थल पर जाने के बजाय सीधे हेलीकॉप्टर से जाने का विकल्प चुना.

नेपाल को लेकर भारत और चीन के बीच प्रतिद्वन्द्विता रहती है. दोनों ही विशाल पड़ोसी इस छोटे हिमालयी देश में योजनाओं में निवेश करते हैं. आमतौर पर नेपाल दोनों देशों के बीच संतुलन बनाकर चलता है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के सालों में उसका झुकाव चीन की ओर बढ़ा है, जिसके पीछे चीन का भारी-भरकम निवेश भी है.

चीन का निवेश

चीन ने लुंबिनी के नजदीक भैराहवा में 7.6 करोड़ डॉलर यानी लगभग 6 अरब रुपये की लागत से यह हवाई अड्डा बनाया है. हालांकि इस परियोजना को एशियाई विकास बैंक और ओपेक देशों द्वारा धन दिया गया है. चीन के नॉर्थवेस्ट सिविल एविएशन एयरपोर्ट कंस्ट्रक्शन ग्रुप ने इसका निर्माण किया है. नेपाल का यह मात्र दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है.

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एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद देउबा लुंबिनी में महात्मा बुद्ध की मायादेवी के मंदिर पहुंचे, जहां नरेंद्र मोदी अलग से पहुंचे और दोनों प्रधानमंत्रियों ने पूजा अर्चना की. मोदी ने एक भाषण में कहा, "दोनों देशों में भगवान बुद्ध को लेकर श्रद्धा हमें एकसूत्र में पिरोती है, एक परिवार का सदस्य बनाती है." उधर नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय नेता की लुंबिनी यात्रा इस जगह को अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में विशेष जगह देगी.

नेपाल की सिविल एविएशन अथॉरिटी के मुखिया प्रदीप अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि अब तक काठमांडु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ही यातायात होता था लेकिन वह अपनी पूरी क्षमता पर पहुंच चुका था. उन्होंने कहा, "नेपाल में हवाई यात्रियों की संख्या रोजाना के हिसाब से बढ़ रही है. हम काठमांडु में और उड़ानें नहीं जोड़ सकते. इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि नया हवाई अड्डा ज्यादा उड़ानों और यात्रियों की जरूरतें पूरी कर पाएगा."

लुंबिनी यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शामिल है. वहां हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक जाते हैं, जिनमें कंबोडिया, थाईलैंड, लाओस, श्रीलंका, म्यांमार और भारत से आने वाले लोग शामिल हैं.

भारत की पनबिजली परियोजना

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने मिलकर एक पनबिजली परियोजना के निर्माण का ऐलान किया है. 695 मेगावाट का यह हाइड्रोपावर प्लांट नेपाल के पूर्व में अरुण नदी पर बनाया जाएगा, जिससे नेपाल को 152 मेगावाट की मुफ्त बिजली मिलेगी.

नेपाली अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को अरुण-4 नाम दिया गया है और इसे भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड व नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी द्वारा संयुक्त रूप से बनाया जाएगा. अथॉरिटी के प्रवक्ता सुरेश बहादुर भट्टराई ने बताया कि दोनों की साझेदारी 51-49 की होगी.

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भट्टराई ने कहा, "अरुण-4 प्रोजेक्ट से नेपाल को 152 मेगावाट बिजली मुफ्त मिलेगी. उसके बाद बची बिजली दोनों देशों के बीच 51-49 के अनुपात में बांटी जाएगी. अभी लागत पर विमर्श जारी है और जो भी खर्चा होगा उसे इसी अनुपात में बांटा जाएगा."

नरेंद्र मोदी के दौरे पर भारत और नेपाल के बीच छह समझौते हुए हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय कंपनियां कुल मिलाकर 8,250 मेगावाट बिजली उत्पादन की परियोजनाओं पर बातचीत कर रही हैं और उम्मीद है कि अतिरिक्त बिजली को भारत को बेचा जाएगा.

नेपाल के पास 42,000 मेगावाट पनबिजली उत्पादन की क्षमता है लेकिन फिलहाल यह 1,200 मेगावाट बिजली ही पैदा कर रहा है. उसकी अपनी जरूरत 1,750 मेगावाट है और जरूरत का बाकी का हिस्सा वह भारत से खरीदता है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

Source: DW

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