Pilibhit : चाकू के हमले से घायल बच्ची का वीडियो बनाते रहे लोग, एक घंटे तड़पती रही 10 वर्षीय मासूम

एक 10 वर्षीय पुत्री को किसी अज्ञात ने चाकू से हमला कर मार डाला। उससे भी ज्यादा दुखद और अफ़सोसजनक बात तो यह है कि जब वह खेत में लहूलुहान मिली तो जिन्दा थी।

People kept making video of girl injured in knife attack in Pilibhit 10 year old innocent kept suffering for an hour

जब जब कोई ऐसा झकझोर कर रख देने वाला समाचार आँखों के सामने से गुजरता है तो मन द्रवित एवं बेहद व्यथित हो जाता है और बस दिल चीत्कार कर उठता है और मुँह से यही आवाज आती है "मानवता सचमुच मर चुकी है।" आज भी एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आया है जिसमे एक 10 वर्षीय पुत्री को किसी अज्ञात ने चाकू से हमला कर मार डाला। उससे भी ज्यादा दुखद और अफ़सोसजनक बात तो यह है कि जब वह खेत में लहूलुहान मिली तो जिन्दा थी। लेकिन आसपास खड़े लोग तड़पती हुई उस बच्ची का आधा पौन घंटे वीडियो बनाते रहे, अस्पताल ले जानी की हिम्मत किसी ने न दिखाई। नतीजन उस मासूम ने अपना दम तोड़ दिया।

10 वर्षीय बेटी की हत्या

10 वर्षीय बेटी की हत्या

दरअसल, पीलीभीत के थाना अमरिया क्षेत्र के गांव माधौपुर में 10 वर्षीय बच्ची पुत्री फिज़ा अपने चाचा शादाब के साथ कल बराबर के गांव में मेला देखने गई थी। मेले में ही बच्ची गायब हो गई थी जिसके बाद चाचा व परिवार वाले बच्ची को तलाश रहे थे। काफी ढूंढने के बाद सुबह खबर मिली कि गेहूं के खेत में किसी बच्ची का शव मिला है। परिजनों ने जाकर देखा कि यह उन्ही की बच्ची का शव है। पास में ही चाकू पड़ा मिला है और बच्ची के पेट पर हमले के निशान भी हैं। समझा जा रहा है कि आरोपी ने चाकू से बच्ची पर हमला कर मौत के घाट उतारा है। फिलहाल एसपी का कहना है कि पुलिस मामले में जांच कर रही है और जल्द घटना का खुलासा किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि परिवार वाले रंजिश में हत्या होना बता रहे हैं

मूकदर्शक बने देखते रहे लोग

मूकदर्शक बने देखते रहे लोग

आपको बता दें कि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। दरअसल, सुबह जब फिजा खेत में जख्मी हालत में मिली तो वहां पर लोगों की भीड़ लग्न शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर करीब 20-25 लोगों की भीड़ जमा इखट्टी हो गई। वो लोग अपने-अपने वाहनों से उतरकर तड़पती ही और अपनी आखिरी सांसें गिनती हुई बच्ची को देख तो रहे थे, लेकिन मदद के लिए काेई हाथ आगे नहीं आया। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि बच्ची कुछ बोल तो नहीं पा रही पर अगर उसका दर्द महसूस किया जाए तो आपको समझ आएगा कि मन में वो चीख-चीख कर लोगों से कह रही होगी कि मुझे बचा लो। खून से लथपथ फिजा, कराहने की आवाज, मगर उन्हें सुन रहे 20-25 से अधिक लोगों का हृदय तक नहीं पसीजा। हृदयहीन लोग मोबाइल पर फोटो और वीडियो बनाते रहे, उनमें से कोई भी मददगार बनकर सामने नहीं आया। पुलिस के आते ही भीड़ धीरे-धीरे छंटने लगी।

तुरंत अस्पताल पहुंचा देते तो जान बच सकती थी

तुरंत अस्पताल पहुंचा देते तो जान बच सकती थी

वही डॉक्टर्स का कहना है कि अगर बच्ची को देखने वाले लोग तुरंत अस्पताल पहुंचा देते तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि इंसान ऐसे मौके पर भी अपना फर्ज नहीं निभाएगा तो संकट में कोई भी एक-दूसरे की मदद के लिए आगे नहीं आएगा।
मानवता के लिए धर्म ही सबकुछ नहीं है। मानवता की पहचान होती है उसके जीवन मूल्य से। मानवता उसके भीतर जिन्दा है जिसमे जीवन के मूल्य है | जीवन के मूल्य के अलावा देह के धर्म सब दिखावटी है। धर्म तब माने जब उनके मूल्य, के बारे में, उनकी सोच क्या है, आईडियालोजी क्या है, उस पर विचार करें। लेकिन उस पर कितने लोग विचार करते है यह हम देख ही सकते है। इन्हीं कारणों से आज मानवता हर जगह कमजोर पढ़ रही है और कलयुग बढ़ता जा रहा है।

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