छठ पूजा को लेकर तेजस्वी यादव एक्टिव, खुद डिप्टी सीएम खड़े हो कर करवा रहे हैं साफ-सफाई

नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव एक्टिव मोड में दिखाई दिए थे। विभागों में औचक निरिक्षण के लिए पहुंचना हो या कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर संगठन को मजबूत करना हो। तेजस्वी के जोश का असर उनके कार्यकर्ताओं में भी दिख रहा है और वह तेजस्वी को विकास की छवि बताते हैं। इसी बीच एक बार फिर तेजस्वी एक्टिव मोड में दिखे और छठ पूजा के चलते बिहार में किये जाने वाले इंतेज़ाम और तयारियों का जायजा लेने खुद ग्राउंड पर मौजूद रहे।

खुद खड़े होकर सड़कों पर साफ सफाई करवा रहे हैं

खुद खड़े होकर सड़कों पर साफ सफाई करवा रहे हैं

दरअसल आज 30 अक्टूबर को अस्ताचलगामी यानी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, कल सुबह यानी 31 अक्टूबर को उदयगामी यानी उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा। इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के दिन 28 अक्टूबर से शुरू हुई थी। छठ सूर्य उपासना और छठी माता की उपासना का पर्व है। हिन्दू आस्था का यह एक ऐसा पर्व है, जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है। इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है। यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।
अब आप समझ ही गए होंगे कि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव क्यों छठ पर्व को लेकर इतना सक्रिय हैं और खुद खड़े होकर सड़कों पर साफ सफाई करवा रहे हैं। पर्व को लेकर किये जाने वाले तमाम इन्तेज़ामो में किसी प्रकार की कोई चूक न हो इसलिए अधिकारियों को तमाम दिशा निर्देश दे रहे हैं। वैसे तो हर बार मुख्यमंत्री ही लगातार छठ पर्व को लेकर एक्टिव रहते हैं लेकिन इस बार बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी काफी एक्टिव दिख रहे हैं। यहाँ तक की छठ व्रतियों के लिए जो सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, सड़कों को धोया जा रहा है तेजस्वी यादव खुद अपनी निगरानी में करवा रहे हैं।
आपको बता दें की तेजस्वी यादव बिहार के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ नगर विकास एवं आवास मंत्री भी हैं और पटना नगर निगम भी उनके ही जिम्मे आता है।

क्यों है बिहार के लिए खास छठ पूजा ?

क्यों है बिहार के लिए खास छठ पूजा ?

हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्यपुत्र कर्ण का संबंध बिहार के भागलपुर है। आपको बता दें कि कर्ण ने अपनी तपस्या और श्रद्धा से सूर्य देव की उपासना की थी। इस तपस्या को उन्होंने कई घंटों तक पानी में रहकर किया था और फिर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया था। जिससे सूर्य देव प्रसन्न हुए थे। इसके बाद से ही बिहार में छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हुई और इस कारण से ही बिहार में छठ पूजा का बहुत अधिक माना जाता है और सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। आपको बता दें कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार छठ का व्रत प्रकृति को समर्पित माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं की संतान का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है और उसे दीर्घायु का वरदान मिलता है।

खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से छठ पर्व का महत्व

खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से छठ पर्व का महत्व

वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी छठ पर्व का बड़ा महत्व है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि एक विशेष खगोलीय अवसर, जिस समय सूर्य धरती के दक्षिणी गोलार्ध में स्थित रहता है। इस दौरान सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाती है। इन हानिकारक किरणों का सीधा असर लोगों की आंख, पेट व त्वचा पर पड़ता है। छठ पर्व पर सूर्य देव की उपासना व अर्घ्य देने से पराबैंगनी किरणें मनुष्य को हानि न पहुंचाएं, इस वजह से सूर्य पूजा का महत्व बढ़ जाता है।

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