नकलचियों को पकड़ने के लिये नीतीश कुमार ने बनाया प्लान
पटना। सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई कि एक पिता अपने बेटो को नकल की पर्ची खुद देने स्कूल पहुंचे... तब बिहार की शिक्षा व्यवस्था की चारों तरफ थू-थू मच गई। आखिर कार खबर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंची तो उन्होंने नकलचियों पर नकेल कस दी। हालांकि उन्हें होई कोर्ट की भी फटकार मिली थी।
बिहार में मैट्रिक की परीक्षा में बडे़ पैमाने पर नकल की घटना प्रकाश में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। असल में पटना हाई कोर्ट ने परीक्षा में व्यापक पैमाने पर नकल के लिए सरकार की आलोचना करते हुए नीतीश सरकार को इसे रोकने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कदाचार की शिकायत मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों और दंडाधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में गत 17 मार्च से मैट्रिक की परीक्षा चल रही है।
रिश्तेदार कराने पहुंचे थे नकल
हाल में समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों पर कुछ फोटो दिखाए गए, जिनमें परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षार्थियों के, दोस्तों, अभिभावकों, रिश्तेदारों और सहयोगियों को अपने अपने उम्मीदवारों को नकल कराने के लिए खिड़कियों और छज्जों पर चढ़ते लटकते देखा जा सकता है। कुछ स्थानों पर तो पैसे के बदले पुलिसकर्मियों को भी नकल में मदद करते दिखाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश एल नरसिंहा रेड्डी और न्यायमूर्ति विकास जैन ने मैट्रिक परीक्षा में बडे़ पैमाने पर नकल को लेकर एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर को जनहित याचिका में परिवर्तित करते हुए प्रदेश के पुलिस कप्तान को इसपर तुरंत रोक लगाए जाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने शिक्षा विभाग को इस मामले में आगामी शुक्रवार को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह आदेश वरिष्ठ अधिवक्ता और आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी बसंत कुमार द्वारा मैट्रिक परीक्षा को लेकर अखबारों में छपी खबरों की ओर ध्यान आकृष्ट कराए जाने पर आया।इससे पूर्व शिक्षा मंत्री पी के शाही ने गुरुवार को यह कहकर आलोचना को न्यौता दे दिया कि मैट्रिक परीक्षा में परीक्षाथियों के अभिभावकों, रिश्तेदारों और सहयोगियों के सहयोग के बिना नकल पर पूरी तरह रोक लगाना अकेले सरकार के बूते संभव नहीं है।
पकड़े गये 271 नकलची
मैट्रिक परीक्षा में नकल करते कल पकडे़ गए 271 परीक्षार्थियों को परीक्षा से निष्कासित किया गया था और अब तक ऐसे 786 परीक्षार्थी परीक्षा से निष्कासित किए जा चुके हैं। प्रदेश में कुल तीन लोगों को मैट्रिक परीक्षा में नकल कराने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है और कल 36 अभिभावक गिरफ्तार किए गए थे। गत 17 मार्च से बिहार में जारी मैट्रिक की परीक्षा में 14.26 लाख परीक्षार्थी 1217 केंद्रों पर परीक्षा दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने परीक्षार्थियों के अभिभावकों से नकल कराने से बचने की अपील करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की बदनामी होती है। उन्होंने कहा कि छात्रों को नकल से हासिल किए गए प्रमाण पत्रों के जरिए नहीं बल्कि अपनी मेघा से हासिल की गई सफलता के जरिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।फेसबुक के जरिए नीतीश ने कहा कि बिहार में मैट्रिक की परीक्षा में नकल की जो तस्वीरें सामने आयी हैं वह किसी एक क्षेत्र की घटना हो सकती है यह पूरे बिहार की कहानी नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र मेघावी हैं और देश तथा दुनिया में अपनी प्रतिभा से जगह बनाते रहे हैं। नकल की कुछ तस्वीर बिहार की प्रतिभा पर हावी नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री की इस बैठक में शिक्षा मंत्री पी के शाही, पुलिस महानिदेशक पी के ठाकुर, गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी और शिक्षा विभाग के प्रधानसचिव आर के महाजन मौजूद थे।













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