OMG! JDU की EX विधायक ऊषा सिन्हा ने 8 साल की उम्र में ही पास कर लिया हाई स्कूल
पटना (मुकुन्द सिंह)। बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद की पत्नी ऊषा सिन्हा ने महज 8 साल की उम्र में मैट्रिक और 10 साल की उम्र में इंटर पास कर लिया था। साथ ही महज 12 साल में बीए और 13 साल में बीएड। जी हां अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे संभव हो सकता है कि 8 साल में कोई मैट्रिक पास कर जाए और 13 साल में बीएड। तो हम आपको बताते चलें कि वर्ष 2010 में जदयू की टिकट पर हिलसा से चुनाव लड़ने वाली ऊषा सिन्हा ने अपने शपथ पत्र में अपनी उम्र 49 वर्ष बताई थी। जिसके जरिए यह खुलासा सामने आया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के हिलसा से जदयू की विधायक रही ऊषा सिन्हा वर्तमान में कॉलेज ऑफ कॉमर्स के हिंदी विभाग में कार्यरत है। वर्ष 2010 मे उन्होंने चुनाव लड़ने के दौरान अपनी उम्र तथा शैक्षणिक योग्यता की जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से दिया था। उनके द्वारा दिए गए एफिडेविट की अगर मानें तो उनकी उम्र 49 साल बताई जा रही है। तथा एफिडेविट मे दिए गए शैक्षणिक योग्यता की अगर बात करें तो उन्होंने वर्ष 1969 मे उत्तर प्रदेश बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।
शपथ पत्र का अगर पोस्टमार्टम किया जाए तो कई ऐसी बातें सामने आती है जिसे देख कर दिमाग घूमने लगेगा। शपथ पत्र की अगर मानें तो उनका जन्म 1961 में हुआ फिर आगे की पढ़ाई लिखाई करते हुए उन्होंने 1969 में यूपी बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। जी हां शायद अब आपका भी दिमाग घूम रहा होगा। मतलब ऊषा सिन्हा ने एक अलग इतिहास बनाते हुए 8 साल में मैट्रिक की परीक्षा पास कर पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी पंचम लहराई होगी। यह तो थी मैट्रिक की परीक्षा की बात।

जहां 8 वर्ष की उम्र में मैट्रिक पास करने वाली विधायिका ने 10 साल की उम्र में इंटर की परीक्षा भी पास करते हुए आगे की पढ़ाई जारी रखा तथा 12 साल की उम्र में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद 13 साल की उम्र में बीएड की डिग्री हासिल की। बीएड की डिग्री हासिल करने के बाद ऊषा सिन्हा ने अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए महज 15 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के अवध विश्विद्यालय से मास्टर ऑफ़ आर्ट्स एमए की डिग्री हासिल कर ली।
अब हम आपको बताते हैं एमए की डिग्री हासिल करने का वह सच जिसे सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। क्योंकि ऊषा सिन्हा ने किस कॉलेज से एमए की डिग्री प्राप्त की थी इस कॉलेज की स्थापना 1975 में हुई थी। हम बात कर रहे हैं डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की जिसे अब लोग अवध विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता हैं। फैजाबाद में 4 मार्च 1975 को स्थापित किया गया था। एमए की पढ़ाई के लिए दो वर्ष का समय लगता है। लेकिन उन्होंने 1 वर्ष मे ही कैसे एमए की पढ़ाई पूरी कर ली। जिस कॉलेज को अस्तित्व में आए 1 वर्ष हुआ है वह भला मास्टर डिग्री कैसे दे सकता है।
शायद ऊषा सिन्हा के द्वारा एक वर्ष में एमए की डिग्री किसी तरह हासिल कर लिया गया लेकिन कॉलेज का चयन करने मे गलती हो गई। लेकिन उसकी इस गलती का एहसास किसी को नहीं हुआ और उसने लगे हाथ 23 साल की उम्र में 1984 में पीएचडी की डिग्री मगध विश्वविद्यालय से हासिल कर अपने नाम के पहले डॉक्टर लिखना शुरु कर दिया। जिसके बाद कॉलेज ऑफ कॉमर्स के हिंदी विभाग मे नौकरी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद अपने पति की पहुंच और पैरवी के वजह से उसे 2010 में जदयू से विधायक का टिकट मिला। नालंदा के हिलसा से चुनाव लड़ते हुए उसने जीत हासिल की।












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