बिहार में डॉक्टर ने महिला की नसबंदी के दौरान पेट में छोड़ा रुई का बंडल

पटना। बिहार में नकल और टीचरों की लापरवाही का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब डॉक्टर की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यहां पर एक डॉक्टर ने महिला की नसबंदी के दौरान रुई का छोटा बंडल और गाज पेट में ही छोड़ दी। [बिहार की हर बड़ी खबर]

यह मामला तब उजागर हुअा जब बिहार मानवाधिकार आयोग ने डॉक्टर के विरुद्ध कारवाई करने की मांग की। आयोग ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र को संज्ञान में लेते हुए चिकित्सा विभाग ने बख्तियारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात शल्य चिकित्सक डॉ रंजीत कुमार द्वारा किसी तरह की सर्जरी करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

आयोग की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख ने भी इस मामले की जांच की थी और उन्होंने भी इसे घोर आपराधिक चिकित्सकीय गलती करार दिया था। हालांकि बिहार में इस तरह की चिकित्सकीय गलती कोई नई बात नहीं है लेकिन विगत 50 वर्षों में शायद यह पहला मौका है जब किसी डॉक्टर की गलती पर एमसीआई ने इस तरह का कठोर फैसला लिया है।

2011 में जब नसबंदी कराने गई शैला देवी

दरअसल यह मामला पटना जिला के अथमल गोला थानाक्षेत्र के सबनीमा गांव निवासी राम नारायण सिंह ने वर्ष 2011 में आयोग में शिकायत दर्ज करायी थी कि उन्होंने अपनी पत्नी शैला देवी की नसबंदी का ऑपरेशन बख्तियारपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात शल्य चिकित्सक डॉ रंजीत कुमार से उनके बख्तियारपुर के सीढ़ी घाट स्थित साक्षी सर्जरी सेंटर में दिनांक 13 दिसंबर, 2010 को कराया था।

उस ऑपरेशन में डा. रंजीत कुमार ने उनकी पत्नी के पेट में न केवल रुई और गॉज छोड़ दिया बल्कि उन्होंने उनकी छोटी आंत की नली को पेशाब की नली से जोड़ दिया। जिससे शैला देवी कुछ भी खाती थी तो वह महज 15 मिनट के अंदर उनके पेशाब के रास्ते से बाहर आ जाता था। जब शैला देवी की तबियत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें इलाज के पटना के अशोक राजपथ पर खुदाबख्श लाइब्रेरी के समीप डा. निर्मल कुमार की क्लिनिक में लाया गया। तब पता चला कि शैला देवी के पेट में रुई का बंडल और गॉज छोड़ दिया गया है।

डॉक्टर के विरुद्ध एफआईआर

आयोग में इस मामले की सुनवाई कर रहे आयोग के सदस्य व राज्य के पूर्व डीजीपी नीलमणि ने बताया कि डॉ निर्मल कुमार ने शैला देवी को तत्काल पीएमसीएच में भर्ती कराया और डा. रंजीत कुमार द्वारा गलत तरीके से जोड़ी गई छोटी आंत से पेशाब की नली को ठीक किया गया। पीएमसीएच में शैला देवी का ऑपरेशन डा. (प्रो.) आइएस ठाकुर ने किया था। जब यह मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष आया तो आयोग ने पटना के एसएसपी को डा. रंजीत कुमार के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने का निर्देश दिया।

फिलहाल इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में दोषी डाक्टर के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दिया है लेकिन मामले की फिलहाल सुनवाई शुरू नहीं हुई है। इधर, आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को पीडि़त महिला को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है और मुआवजे की यह राशि दोषी चिकित्सक से वसूल करने को कहा है।

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