पाकिस्‍तान की पहली हिंदु दलित महिला सीनेटर कृष्‍णा कुमार कोहली को मिला BBC की लिस्‍ट में स्‍थान

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान की पहली महिला सीनेटर कृष्‍णा कुमार कोहली को बीबीसी की 100 प्रभावशाली और प्रेरणाशाली महिलाओं की लिस्‍ट में जगह दी गई है। 40 वर्ष की कोहली पाकिस्‍तान के दलित समुदाय से आती हैं और वह सांसद होने के अलावा मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं। जिस लिस्‍ट में कोहली को जगह दी गई है उस लिस्‍ट में चेल्‍सी क्लिंटन जैसी महिलाएं शामिल हैं। कोहली को इस लिस्‍ट में 48वां स्‍थान हासिल हुआ है। मार्च में कोहली को पाकिस्‍तान की सीनेट के लिए चुना गया था और वह पिछले कई वर्षों से पाकिस्‍तान में बंधुआ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।

क्‍यों चुनी गईं कृष्‍णा

क्‍यों चुनी गईं कृष्‍णा

कृष्‍णा कुमार कोहली पहली ऐसी थारी हिंदू महिला हैं जो पाकिस्‍तान की सीनेट के लिए चुनी गई थीं। बीबीसी ने उनके बारे में लिखा है, 'कृष्‍णा को चुना गया है क्‍योंकि उन्‍होंने पाकिस्‍तान में अपनी जिंदगी के कई वर्ष बंधुआ मजदूरों के हक की लड़ाई में बिताएं हैं। इसके अलावा उन्‍होंने महिलाओं के हक में भी आवाज उठाई है और उन्‍होंने खुद भी तीन वर्षों तक बंधुआ मजदूर होने का दर्द झेला है।' कृष्‍णा, पाकिस्‍तान के उस कोहली समुदाय से आती हैं जो यहां के सिंध प्रांत के तहत आने वाले नागरपाकर इलाके के गांव धाना गाम का रहने वाला है। इस इलाके में हिंदुओं की संख्‍या बहुत कम है।

तीन वर्ष तक की बंधुआ मजदूरी

तीन वर्ष तक की बंधुआ मजदूरी

कोहली इस वर्ष मार्च में पाकिस्‍तान की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं दिवंगत बेनजीर भुट्टो की पार्टी पाकिस्‍तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के टिकट पर सीनेट पहुंची थीं। कृष्‍णा तीन वर्ष तक उमेरकोट जिले में एक मकान मालिक के घर पर कुछ और बच्‍चों के साथ बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रही थी। अचानक एक दिन पुलिस के छापे ने उन्‍हें और बाकी बच्‍चों को आजादी दिलाई। इसके बाद उनके माता-पिता ने उन्‍हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और प्राथमिक शिक्षा से लेकर पोस्‍टग्रेजुएशन तक की पढ़ाई में उनकी मदद की। मात-पिता के प्रोत्‍साहन के बाद कृष्‍णा ने जामशोरो स्थित सिंध यूनि‍वर्सिटी से समाजशास्‍त्र में मास्‍टर्स किया।

हिंदुओं के आवाज उठाती रहेंगी कृष्‍णा

हिंदुओं के आवाज उठाती रहेंगी कृष्‍णा

सीनेट के लिए चुने जाने के बाद कृष्‍णा ने वादा किया कि वह अपने समुदाय के गरीब और अधिकारों से वंचित लोगों के हक के लिए लड़ाई लड़ती रहेंगी। पाक में में हिंदुओं कुल आबादी का सिर्फ दो प्रतिशत हिस्‍सा ही हैं। कई वर्षों तक पाक में बसे हिंदुओं को सामाजिक तिरस्‍कार को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कृष्‍णा को लोग किशू बाई के नाम से भी जानते हैं। साल 1994 में कृष्‍णा की उम्र 16 वर्ष थी और वह नवीं कक्षा में पढ़ रही थीं, इसी समय उनकी शादी हो गई। उन्‍होंने अपनी बाकी पढ़ाई शादी के बाद पूरी की थी। साल 2007 में कृष्‍णा ने इस्‍लामाबाद स्थित मेहरगढ़ ह्यूमनराइट्स यूथ लीडरशिप ट्रेनिंग कैंप में कई अहम बातों को समझा।

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