पाकिस्तान के जिस प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ को बर्खास्त कर दिया था, उसका क्या हुआ ? जानिए
नई दिल्ली, 1 अप्रैल: पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास सैन्य तख्तापलट और मिलिट्री रूल के लिए कुख्यात रहा है। पाकिस्तानी सत्ता पर सेना का इस कदर दखल रहा है कि वहां कोई भी सरकार अपना कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर पाई है। लेकिन, पाकिस्तान में एक ऐसा प्रधानमंत्री भी हो चुका है, जिसने एक पाकिस्तानी आर्मी चीफ को बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाई थी। पाकिस्तान के वो प्रधानमंत्री कोई और नहीं नवाज शरीफ थे, जो खुद भी तख्तापलट के शिकार हुए थे। लेकिन, उन्होंने उसके बाद भी बाउंसबैक किया और फिर भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दे दिए गए।

पाकिस्तान की राजनीति में सेना का रहा है दबदबा
पाकिस्तानी शासन में सेना के दबदबे ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों की हमेशा से सांसें अटकाए रखी हैं। इसकी वजह ये भी है कि पाकिस्तानी आवाम के बीच उसकी सेना की लोकप्रियता राजनेताओं से कहीं ज्यादा रहती है। पाकिस्तान में मार्शल लॉ का प्रभाव इस तरह से बना हुआ है कि आजाद मुल्क वाला अहसास वहां की जनता कम ही कर पाई है। वहां की सभी निर्वाचित सरकारों ने किसी ने किसी वजह से समय से पहले ही दम तोड़ा है, जिनमें कई बार सीधी सैन्य कार्रवाई शामिल रही है। अगर इमरान खान विश्वास मत हारते हैं तो यह सोचकर खुश हो सकते हैं कि उन्हें जनरल बाजवा के हाथों सत्ता से बेदखल नहीं होना पड़ा है।

पाकिस्तान की सत्ता 34 साल फौज के हाथों में रही
पाकिस्तान के फौजी शासकों ने कुल 34 साल तक मुल्क पर सीधा राज किया है। पीछे से आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के इशारे पर काम करने वाले भी इमरान खान कोई पहले पीएम नहीं हैं। इसलिए पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों ने ना तो कभी स्वतंत्र होकर काम किया है और ना ही किसी ने कभी भी पूरी तरह से सुरक्षित महसूस किया है। फौजी शासन की तलवारें वहां हमेशा लटकी रही हैं। लेकिन, इसके बावजूद पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसा भी वाक्या हो चुका है, जिसमें प्रधानमंत्री ने फौज के प्रमुख को कुर्सी से बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाई थी।

नवाज शरीफ ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ को बर्खास्त किया था
आर्मी चीफ को हटाने वाले पाकिस्तान के एकमात्र प्रधानमंत्री रहे हैं नवाज शरीफ। उन्होंने 1998 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जहांगीर करामात को उनके पद से बर्खास्त कर दिया था, जबकि वे पाकिस्तानियों के बीच बहुत ही लोकप्रिय थे। क्योंकि, उन्होंने कभी बेनजीर भुट्टों की सरकार को बचाने में मदद की थी। लेकिन, नवाज चुनावों में बहुमत के घोड़े पर सवार होकर आए थे। जब 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो बदले में पाकिस्तान ने भी किया और वह सफल भी रहा। लेकिन, लोकप्रियता के चक्कर में शरीफ और जहांगीर के बीच टकराव शुरू हो गया। वैसे भी वह भुट्टो के नियुक्त किए गए थे। इसलिए नवाज ने उन्हें बर्खास्त करने में देरी नहीं की और हैरानी की बात थी कि फौज ने सबकुछ बर्दाश्त कर लिया था।

नवाज शरीफ से पाकिस्तानी फौज ने कैसे लिया बदला ?
तब नवीज शरीफ ने जहांगीर की जगह परवेज मुशर्रफ को आर्मी प्रमुख की कुर्सी पर बिठाया था। लेकिन, मुशर्रफ पाकिस्तानी इतिहास के सबसे खुराफाती जनरलों में से निकले। कुछ ही महीनों बाद उन्होंने कारगिल घुसपैठ की साजिश रच दी। नतीजा 1999 के मई से जुलाई के बीच में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग देखने को मिली। कारगिल में पाकिस्तानी सेना की बुरी तरह पिटाई के बाद नवाज शरीफ सरकार की खूब भद्द पिटी। इसके चलते एकबार फिर से प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ के बीच ठननी शुरू हो गई। शरीफ ने जहांगीर की तरह मुशर्रफ को भी हटाने की कोशिश शुरू कर दी। मुशर्रफ श्रीलंका दौरे पर गए तो नवाज ने उन्हें भी बर्खास्त कर दिया। वे पाकिस्तान लौटे तो कराची एयरपोर्ट पर उनके विमान को उतरने नहीं दिया गया। लेकिन, पाकिस्तानी सेना में आर्मी चीफ के लोगों ने प्रधानमंत्री को ही नजरबंद करके जेल में ठूंस दिया और आखिरकार 12 अक्टूबर,1999 को उनका तख्तापलट कर दिया। बाद में नवाज फिर पीएम बने और फिर भ्रष्टाचार के दोषी साबित होकर निर्वासित जीवन जीने को मजबूर हो गए












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