पाक का उधार चुकाने को तैयार अमेरिका ने रख दी मुश्किलें शर्तें
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से अमेरिका की वार्षिक रक्षा नीति पर साइन किए गए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी रक्षा नीति है जिसमें पाकिस्तान के लिए भी एक बिलियन डॉलर की रकम को भी मंजूरी दे दी गई है।

अमेरिका की शर्तें और पाक का उधार
रुकिए आप कुछ और समझें हम आपको बता देना चाहते हैं कि यह रकम पाक को किसी मदद के लिए नहीं मिली है, बल्कि अमेरिका ने एक तरह से उसका उधार चुकाने के लिए उसे दी है। अमेरिका पाक का उधार भी सिर्फ अपनी शर्तों पर ही लौटा रहा है।
सीएसफ के तहत मिली है पाक को रकम
शुक्रवार को ओबामा ने वर्ष 2015 के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए ) पर साइन किए हैं। इस एक्ट के तहत अमेरिका करीब 578 बिलियन डॉलर की रकम अपनी रक्षा तैयारियों पर खर्च करेगा। वहीं पाक को जो रकम दी गई है वह अमेरिका के सीएसएफ फंड यानी कोआलिशन सपोर्ट फंड के तहत दी गई है।
आपको बता दें कि सीएसएफ का मतलब पाक को किसी तरह की कोई सैन्य सहायता नहीं देना है बल्कि उसकी उस रकम को वापस करना है जो पाक ने अफगानिस्तान के अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान अमेरिकी सेना पर किसी न किसी तरह खर्च की थी।
उधार ने बढ़ा दी पाक की मुश्किलें
अमेरिका ने पाक को एक बिलियन डॉलर की रकम देते हुए उसके सामने कुछ शर्तें भी रख दी हैं। इन शर्तों के तहत पाकिस्तान को अपने देश में मौजूद आतंकी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी और साथ ही साथ उसे हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ और सख्त होना होाग।
हालांकि अमेरिका रक्षा सचिव के पास यह अधिकार होता है कि वह इन शर्तों में राष्ट्रीय हित को देखते हुए ढील दे दें और अमेरिका पिछले कई वर्षों से ऐसा करता आ रहा है।
अमेरिका और पाकिस्तान अब इस बारे में बातचीत कर रहे हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों के जाने के बाद भी सीएसफ को बढ़ा दिया जाए। एनडीएएस ने इस बारे में अमेरिका के रक्षा सचिव से बात की है और उन्होंने अमेरिका-पाक के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में एक रिपेार्ट मांगी है। साथ ही एक बिल के तहत दिसंबर 2017 तक इस तरह की रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है।
अमेरिका के रक्षा सचिव पर होगी जवाबदेही
एनडीएए 2015 के तहत इस एक बिलियन डॉलर की रकम में से 300 मिलियन डॉलर तब तक नहीं दिए जाएंगे जब तक अमेरिका के रक्षा सचिव कांग्रेस की डिफेंस कमेटी के सामने इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं कि पाक की ओर से नॉर्थ वजीरिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई चालू रखी है।
साथ ही वह अपने देश में मौजूद हक्कानी नेटवर्क के लिए मौजूद सुरक्षित पनाहगारों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा सचिव को इस बात के बारे में भी प्रमाण देने की जरूरत होगी कि नॉर्थ वजीरिस्तान कभी भी हक्कानी नेटवर्क के लिए सुरक्षित स्थान बन सकेगा।
साथ ही इस बात के लिए भी विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी पाक कितने प्रभावी ढंग से अमेरिका के साथ मिलकर अलकायदा, तहरीक-ए-तालिबान और दूसरे चरमपंथी गुटों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।












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