नोएडा ट्विन टावर के गिरने से सता रही प्रदूषण की चिंता, CSE एक्सपर्ट बोले- दिल्ली-NCR में लंबे समय तक रहेगा असर
नई दिल्ली, 25 अगस्त। नोएडा स्थित सुपरटेक ट्विन टावरों को 28 अगस्त को गिरा दिया जाएगा। इन टावरों को विस्फोटक की मदद से ध्वस्त किया जाएगा। इन दोनों टावरों को गिराने से होने वाले कंपन और प्रदूषण को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। एक तरफ जहां इस टावर के पड़ोस में रहने वाले लोगों को अपने घर को नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है तो दूसरी तरफ प्रदूषण का खतरा भी सता रहा है।
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दिल्ली-एनसीआर में दिखेगा असर
टावर को गिराए जाने से भारी मात्रा में धूल और मिट्टी प्रदूषण फैलाएगी। लिहाजा आस-पास रहने वाले लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पर्यावरण के एक्सपर्ट का मानना है कि यह धूल-मिट्टी एक दिन के लिए नहीं रहेगी बल्कि इससे वायु में पैदा हुआ वायु प्रदूषण कई दिनों तक लोगों को परेशान करेगा। लोगों को कई तरह की मुश्किलें हो सकती हैं। इसका असर पूरे दिल्ली और एनसीआर में देखने को मिलेगा और प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
4 सितंबर तक का समय
बता दें कि इन टावरों को ध्वस्त किए जाने को कई बार चुनौती दी गई। लेकिन 12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने टावर को ध्वस्त करने की इजाजत दे दी। कोर्ट के आदेश के बाद 28 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे इन टावरों को गिरा दिया जाएगा। अगर किसी भी तरह की तकनीकी दिक्कत आती है या फिर मौसम सही नहीं रहता है तो सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 4 सितंबर तक का समय दिया है।
देश की सबसे ऊंची इमारत हो रही ध्वस्त
बिल्डिंग को ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया नियंत्रिण परिस्थितियों में की जाएगी। लेकिन बावजूद इसके पर्यावरण को लेकर चिंता बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यूपी प्रदूषण नियंत्रमण बोर्ड ने जाहिर की है। बिल्डिंग में ब्लास्ट के बाद इसके गिरने से आसमान में उठने वाला धुंआ हवा की गुणवत्ता को खराब कर सकता है। माना जा रहा है कि इसकी वजह से पीएम10 कई दिनों तक बढ़ा रहेगा। पीएम 2-5 भी प्रभावित होगा। बता दें कि ट्विन टॉवर कुतुब मीनार से भी ऊंचे हैं और भारत की सबसे ऊंची इमारत है जिसे ध्वस्त किया जाएगा।
आस-पास के लोगों को होगी दिक्कत
एक्सपर्ट ने धूल, धुंआ और वायु प्रदूषण को लेकर सबसे अधिक चिंता जाहिर की है। इसकी वजह से आस-पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। लोगों की आंख में खुजली हो सकती है, नाक में भी खुजली हो सकती है। अस्थमा से पीड़ित लोगों को ज्यादा दिक्कत होगी। आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉक्टर सच्चिदानंद ने कहा कि यह बड़े स्तर का ध्वस्तिकरण है, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इसके लंबे प्रभाव होंगे। मुझे संदेह है कि यह हफ्ते से ज्यादा नहीं रहेगा।












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