Ladakh Border : घुटनों तक बर्फ से ढकी भूमि को मानइस 7 डिग्री में कैसे नापा? जानिए प्रणव की जुबानी

भारत के रक्षा विभाग की भूमि सर्वेक्षण की टीम ने पहली बार लेह-लद्दाख की सीमा पर भूमि सर्वेक्षण किया है। डेढ़ साल में पूरे होने वाले लद्दाख सीमा की भूमि नापने के काम को नासिक के प्रणव के सहयोग से महज 8 माह में पूरा कर लिया

Ladakh union territory border

Ladakh Union Territory History in Hindi : लेह-लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद उसकी सीमा पर भूमि सर्वेक्षण करना कम चुनौतिपूर्ण नहीं था, क्‍योंकि माइनस सात डिग्री तापमान, जमीन से दस हजार फीट की ऊंचाई, घुटनों तक जमा बर्फ और शरीर पर लदा 20 से 25 किलो का वजन। फिर भी विपरीत परिस्थितियों को मात देकर वो कर दिखाया जो अब तक कभी नहीं हुआ था। यह सब रक्षा विभाग की भूमि सर्वेक्षण टीम ने नासिक के प्रणव की मदद से किया।

लेह-लद्दाख सीमा पर भूमि सर्वेक्षण

लेह-लद्दाख सीमा पर भूमि सर्वेक्षण

मीडिया से बातचीत में प्रणव ने लेह-लद्दाख सीमा पर भूमि सर्वेक्षण की पूरी कहानी बयां की, जो बुलंद हौसलों लबरेज है। पग-पग पर चुनौतियों का सामना करते हुए डेढ़ साल में पूरा होने वाला भूमि सर्वेक्षण महज आठ में ही खत्‍म कर दिखाया। इस काम में भारतीय सेना के जवानों ने भी मदद की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूरी टीम को सम्‍मानित भी किया।

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     लद्दाख में पड़ती है खून जमा देने वाली ठंड

    लद्दाख में पड़ती है खून जमा देने वाली ठंड

    दैनिक भास्‍कर एक रिपोर्ट के अनुसार प्रणव बताते हैं कि खून जमा देने वाले लेह-लद्दाख में सबसे बड़ी चुनौती मौसम की थी। पूरा इलाका बर्फ से ढका था। न्‍यूनतम तापमान शून्‍य से सात डिग्री नीचे था। जमीन नापने में पूर्व के निशान खोजने में सबसे बड़ी समस्‍या थी। निशान के लिए काफी मशक्‍कत करनी पड़ी। कई बार तो कई कई घंटों तक मेहनत करने के बावजूद निशान तक नहीं मिलता।

     10 किलो वजन तो कपड़ों का ही हो जाता

    10 किलो वजन तो कपड़ों का ही हो जाता

    लद्दाख का इलाका ऐसा है कि बर्फ, पत्‍थर, मिट्टी, कंटीली झाड़ियां में न कोई सड़क और ना ही कोई पगडंडी। ऐसे में रास्‍ता खोजना मुश्किल था। निशान तो दूर की बात। भूमि सर्वेक्षण की टीम अपने साथ विशेष उपकरण ट्रायपॉड मशीन और नक्‍शे लेकर चलती थी। ऐसे में प्रत्‍येक व्‍यक्ति के पास दस वजन तो कपड़ों का और 20 से 30 किलो उपकरणों का हो जाता था।

     भारतीय सेना के जवान हेलिकॉप्‍टर से पहुंचाते थे भोजन

    भारतीय सेना के जवान हेलिकॉप्‍टर से पहुंचाते थे भोजन

    प्रणव कहते हैं कि भारतीय सेना के जवानों की मदद के बिना लेह-लद्दाख सीमा पर भूमि सर्वेक्षण की कल्‍पना भी नहीं कर सकते। सेना के जवान हम तक खाना पहुंचाते थे, क्‍यों कि भारी बर्फभारी के कारण घर से बाहर निकलना भी मुश्किल होता है। सामान्‍य यातायात का कोई साधन नहीं चलता। पीने का पानी भी टैंकर से सप्‍लाई होता है। वो भी बर्फ के रूप में मिलता। पिघलाकर पीते। यहां खाने में सब्जियां व फल मिलना की सोचना तो बेमानी है। हमें खाना लेकर आने वाले भारतीय सेना के जवानों के हेलिकॉप्‍टर का बेसब्री से इंतजार रहता था।

     लद्दाख का राजस्‍व रिकॉर्ड

    लद्दाख का राजस्‍व रिकॉर्ड

    दरअसल, जम्‍मू कश्‍मीर से अलग करके लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के कारण भारत सरकार यहां की भूमि का सर्वेक्षण करके नक्‍शे, राजस्‍व बही बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आठ माह तक मेहनत करके रक्षा विभाग की टीम ने 1100 एकड़ी जमीन की सीमा रेखा, ड्राइंग और मार्किंग का रिकॉर्ड बनाया है। लद्दाख सामरिक दृष्टि से काफी महत्‍व जगह है।

     लद्दाख का परिचय

    लद्दाख का परिचय

    बता दें कि नया केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख एरिया के दृष्टि से आसपास के क्षेत्रों में सबसे बड़ा है। इसे 'लैंड ऑफ पासेस' (ला-दर्रा, दख-भूमि) के रूप में भी जाना जाता है। इसकी राजधानी लेह है। लेह व कारगिल दो जिले हैं।

    लद्दाख पूर्व में चीनी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, दक्षिण में भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, और पश्चिम में जम्मू और कश्मीर तथा पाकिस्तान प्रशासित गिलगित-बाल्टिस्तान से एवं शिनजियांग के दक्षिण-पश्चिम कोने से दूर उत्तर में काराकोरम दर्रा से घिरा है।

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