49 दिन की सत्ता की ये 4 गलतियां कभी न दोहराएं केजरीवाल!
नयी दिल्ली। एक साल आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर से दिल्ली में कमबैक किया है। पिछली बार के मुकाबले अरविंद केजरीवाल इस बार काफी ताकतवर होकर आए हैं। पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रहे है। सदन में केजरीवाल के सामने विपक्होष के नाम पर केवल 3 सदस्य होंगे। ऐसे में उन्हें महत्वपूर्ण योजनाओं को लेकर विपक्ष का असहयोग या ऐसी की कोई अन्य मजबूरी सरकार के सामने नहीं होगी।

अरविंद केजरीवाल ने जनता से जो भी वादे किए है उन्हें उसपर अमल करने से रोकने वाला कोई नहीं होगा। ये तो देखने वाली बात होगी कि केजरीवाल और उनकी टीम अपने किए वादों में से किना वादा पूरा करती है, लेकिन पार्टी की पिछली 49 दिन की सरकार में हुई गलतियों से सबक लेकर इस बार नहीं दोहराना चाहिए।
पहली गलती: धरना देने से बचें केजरीवाल
केजरीवाल इसबार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रहे हैं, ऐसे में वो एक सक्षम मुख्यमंत्री बनने जा रहे है। उन्हें इस बात को समझना होगा कि वो सीएम है विपक्ष के नेता नहीं। उन्हें अपने वादों को पूरा करने पर फोकस करना चाहिए न कि आंदोलन की राह पकड़ेंगे और केंद्र सरकार के दो-दो हाथ करने की मुद्रा अपनाकर राजधानी की सड़कों पर धरना-प्रदर्शन करते नजर आएंगे।

दूसरी गलती: कानून का सम्मान
बतौर सीएम अगर केजरीवाल पिछली बपार की तरह कानून तोड़ते रहे तो जनता में गलत संदेश जाएगा। दिल्ली ने केजरीवाल पर जो भरोसा दिलाया है उन्हें उस ताकत का इस्तेमाल जनता की भलाई में करनी चाहिए न कि कानून तोड़ने में ।

तीसरी गलती: सीएम की गरिमा का रखे मान
सीएम राज्य का मुखिया होता है। ऐसे में उसे मिली सुरक्षा, सहूलियत, सुविधाएं महज मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार ही नहीं बल्कि उसके निर्बाध कामकाज के लिए जरूरी होती हैं। ऐसे में केजरीवाल अपने पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए न कि अड़ियल रुख अपनाकर सुरक्षा से समझौता न करें।
चौथी गलती: घमंड से बचें
केजरीवाल ने भले ही कार्यकर्ताओं को घमंड न करने की सवाल दी हो, लेकिन खुद केजरीवाल और उनकी सरकार के अन्य मंत्रियों के लिए इस घमंड से दूर रहना एक बड़ी चुनौती होगी।












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