कड़ाके की ठंड के बीच गर्म हुआ अरविंद केजरीवाल का जनता दरबार

केजरीवाल जब सुबह जैसे ही जनता दरबार में पहुंचे वैसे ही भारी भीड़ उनकी तरफ उमड़ पड़ी। इसी बीच भारी शोरशराबा होने लगा, जिस वजह से केरीवाल डेढ़ घंटे में चंद लोगों की ही समस्याएं सुन पाये। हालांकि दरबार में एक हेल्प डेस्क लगायी गई थी, वहां पर नोट की गई समस्याओं पर केजरीवाल ने कहा कि समस्याएं लेकर आये लोगों में सबसे ज्यादा सरकारी कमर्चारी हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी परेशान हैं, किसी को सैलरी नहीं है, तो किसी का विनियमितीकरण नहीं हुआ है तो कोई अपने अधिकारियों से पीड़ित है। दूसरे नंबर की समस्या बिजली पानी से है। केजरीवाल ने बाद में माना कि अव्यवस्था बहुत ज्यादा थी, यहां पर भगदड़ हो सकती थी।
केजरीवाल के वहां से निकल जाने पर जनता में गुस्सा छा गया। कई लोगों ने कहा कि हमने आम आदमी पार्टी को वोट देकर जिताया है, अब उन्हें हमारी समस्याएं सुननी ही होंगी। केजरीवाल ने इस अव्यवस्था को माना और कहा कि फिलहाल जनता दरबार स्थगित कर दिया गया है। अब पूरी प्लानिंग के साथ जनता दरबार लगाया जायेगा। केजरीवाल ने कहा कि मुझे कुछ समय दीजिये मैं बीस-पच्चीस दिन में आपको जवाब दूंगा। मैं आज ही सभी विभागों को चिठ्ठी लिखने जा रहा हूं, कि वो बतायें कि कितने कर्मचारी टम्परेरी बेसिस पर काम कर रहे हैं।
ठंड के बावजूद आये दो हजार से ज्यादा लोग
दिल्ली में शनिवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री नीचे 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और मौसम सर्द रहा। सुबह हल्का कोहरा छाय रहा, लेकिन आगे मौसम साफ रहेगा। कोहरे की वजह से दृश्यता सुबह 8.30 बजे 400 मीटर दर्ज की गई।
इतनी ठंड के बावजूद जनता दरबार में अपनी शिकायतें लेकर लोग सुबह 6 बजे से पहुंच गये। ये लोग दिल्ली के अलग-अलग कोने से लोग यहां आये थे, यानी ये लोग घर से सुबी 4 से 5 बजे निकले होंगे। जाहिर है खराब मौसम से जूझ कर जो लोग यहां पहुंचे, जब उनकी समस्या नहीं सुनी गई, तो उन्हें बुरा तो लगा ही होगा।
प्रमुख समस्याएं जो केजरीवाल के दरबार में आयीं
शहादरा के रहने वाले राकेश सिंह- मेरे घर में बिजली का मीटर उखाड़कर बिजली वाले ले गये हैं, मुख्यमंत्री जी कृपया मीटर लगवा दीजिये, बकाया बिजली का बिल माफ कर दीजिये।
जल विभाग, विश्वविद्यालय, बिजली विभाग समेत कई विभागों के कर्मचारी- हम पिछले 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे हैं, हमारी नौकरी परमानेंट नहीं हुई। मुख्यमंत्री जी हमें ठेकेदारी प्रथा से मुक्ति दिलायें।
छात्रों ने इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल कॉलेजों की मनमानी पर शिकायतें कीं। टीचर्स ने कहा कि वो वर्षों से एढॉक पर पढ़ा रहे हैं। लेकिन उनको परमानेंट नहीं किया जा रहा है। मानदेय भी भी बीच-बीच में अटक जाता है।
कामकाजी महिलाओं ने शिकायत की कि दिल्ली में चल रहे तमाम क्रेश और डे केयर मनमानी फीस वसूल रहे हैं। ढेर सारे लोग ऐसे आये, जिन्होंने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की समस्याएं गिनायी।












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