2005 दिल्ली ब्लास्ट मामला: फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने पर विचार कर रही दिल्ली पुलिस

अदालत के फैसले पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कहा कि वो फैसले का सम्मान करते हैं, हालांकि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर भी विचार किया जा रहा है।

नई दिल्ली। साल 2005 में राजधानी दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार को दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत के फैसले पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कहा कि वो फैसले का सम्मान करते हैं, हालांकि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर भी विचार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने कहा कि वो कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार की सजा घटने को लेकर हाईकोर्ट में जाने पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। बता दें कि दिल्ली में सिलसिलेवार बम ब्लास्ट की घटना 2005 में दिवाली से ठीक एक दिन पहले हुई थी। इन धमाकों में 60 लोगों की मौत हुई थी, करीब 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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तारिक डार मामले में दिल्ली पुलिस बना रही खास प्लान

सीरियल धमाकों के लिए तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इन पर धमाकों की साजिश रचने का आरोप था। यह भी माना जा रहा था कि इन धमाकों का मास्टरमाइंड तारिक है जो लश्कर का ऑपरेटिव था। कोर्ट ने इस मामले में तीनों आरोपियों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे। दिल्ली पुलिस ने तारिक अहमद डार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। पुलिस ने कोर्ट में तारिक की कॉल डीटेल भी पेश की, जिसमें दावा किया गया कि वह लश्कर-ए-तोएबा के अपने हैंडलर से बातचीत करता था।

पुलिस ने अक्टूबर 2005 में सीरियल ब्लास्ट में तीन एफआईआर दर्ज की थीं और मामले की तहकीकात शुरू की थी। दिवाली से एक दिन पहले हुए धमाकों में पहला धमाका पहाड़गंज इलाके में शाम करीब 5:38 बजे हुआ। दूसरा धमाका गोविंदपुरी इलाके में 6 बजे और तीसरा धमाका सरोजनी नगर इलाके में शाम 6:05 बजे हुआ। सीरियल धमाकों में पहाड़गंज में 9 लोगों की मौत हुई जबकि 60 लोग घायल हुए। वहीं गोविंद पुरी में चार लोग घायल हुए। भीड़भाड़ वाले सरोजनी नगर में हुए धमाके में 50 लोगों की मौत हुई और करीब 130 लोग घायल हुए। 11 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट में पहले 13 फरवरी को फैसला आना था लेकिन बाद में 16 फरवरी की तारीख तय की गई। कोर्ट ने तारिक को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दोषी ठहराया है। उसे ब्लास्ट के लिए दोषी नहीं माना गया। तारिक 11 साल जेल में बिता चुका है, लिहाजा उसे जेल में अब नहीं रहना पड़ेगा। इस बीच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल तारिक डार के जेल टर्म घटने का मामला हाईकोर्ट ले जाने पर विचार कर रही है।

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