इन 10 कारणों से दिल्ली चुनाव में गेम चेंजर साबित होगी किरण

नयी दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हो गईं। अमित शाह ने ये तो बताया कि बेदी चुनाव लड़ेंगी, लेकिन ये साफ नहीं किया कि वो दिल्ली में किसके खिलाफ चुनाव लड़ेंगीं। बेदी के सीएम पद की दावेदारी पर शाह ने खुलकर जवाब नहीं दिया। साफ है पार्टी अभी इस पर अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है, लेकिन बीजेपी में किरन बेदी के जुड़ने से एक बात तो साफ हो गया है कि अमित शाह उन्हें गेम चेंजर के तौर पर लेकर आएं है। आपको बताते है उन कारणों के बारे में जिससे आप भी मान लेंगे कि किरन बीजेपी के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव में गेम चेंजर साबित होगी।

kiran bedi
  • किरण बेदी केतौर पर दिल्ली में बीजेपी को चेहरा मिल गया है। बीजेपी अब तक पीएम मोदी ने नाम पर चुनाव लड़ रही थी, लेकिन किरन के पार्टी में जुड़ने के साथ बीजेपी को दिल्ली में अपना चेहरा मिल गया हैं। अब बीजेपी किरन को सामने रखकर विरोधियों पर हमले करेगी।
  • बीजेपी दिल्ली में पीएम मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में मोदी बनाम केजरीवाल का चुनाव अटपटा समीकरण हैं। आम आदमी पार्टी इसी को लेकर बार-बार बीजेपी पर हमला करती रही, लेकिन अब दिल्ली के वोटरों के पास केजरीवाल का विकल्प हैं। अब ये लड़ाई बेदी बनाम केजरीवाल हो गया है।
  • केजरीवाल और किरण बेदी एक ही आंदोलन से उठकर आएं है। अन्ना के आंदोलन से केजरीवाल भी उठे और अब किरन ने भी भी बीजेपी का हाथ थाम लिया है, लेकिन किरन ने पास इस मामले में ज्यादा ताकत है क्योंकि उन्होंने जिस पार्टी के साथ राजनीति की शुरुआत की है उसकी ताकतवर सरकार केंद्र में हैं।
  • किरण मोदी कार्ड को खेलने में समर्थ हैं। उनकी अपनी पहचान है और अपना रुतबा।
  • दिल्ली भाजपा खंडहर की तरह रही है। यहां पार्टी के भीतर ब्राह्मण और बनिया लॉबी का प्रभाव रहा है। पार्टी के भीतर मतभेदों के कारण ही वो केजरीवाल के सामने सक्षम उम्मीदवार नहीं उतार सकी। ऐसे में किरण बेदी बराबरी का टक्कर देने के लिए सटीक हैं।
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  • चूंकी केजरीवाल और बेदी एक ही आंदोलन में रहे हैं ऐसे में केजरीवाल के मनोदशा से वो अच्छी तरह से वाकिफ हैं। ऐसे में केजरीवाल के ऊपर करारा हमला करना किरन बेदी के लिए आसान होगा।
  • किरण बेदी भाजपा के हिंदुत्व के चेहरा का उदाहरण नहीं है, ऐसे में वो दिल्ली में अल्पसंख्यकों का वोट हासिल करने में सफल हो सकती हैं।
  • चूंकि किरण बेदी एक पूर्व आईपीएस अधिकारी रही हैं, ऐसे में दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर वोटरों का विश्वास उनपर केजरीवाल के मकाबले कहीं अधिक होगा। लोगों उनपर सुरक्षा में सुधार मुद्दे को लेकर विश्वास जताएंगे।
  • भाजपा में पार्टी फेस की कमी के चलते अब तक मीडिया के कैमरे आम आदमी पार्टी और केजरीवाल की ओर ही रहा था, लेकिन बेदी के आने के बाद केजरीवाल को इसका बड़ा नुकसान होगा। किरण बेदी केजरीवाल के मीडिया कवरेज को उदासीन करने में कामयाब होगी।
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