नैनीताल: जिन्ना ने जिस फेमस होटल में मनाया था हनीमून उसमें लगी भीषण आग

Nainital News, नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल में मेट्रोपोल होटल में सोमवार देर रात भीषण आग लग गई। आग होटल के परिसर में बने एक भवन में लगी थी। गनीमत रही कि भवन खाली था नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि आग से पूरा भवन जलकर राख हो गया है। बता दें कि यह होटल एक अंग्रेस द्वारा बनवाया गया था। इस होटल में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना अपने हनीमून के लिए आकर रुके थे। वहीं, इस होटल के मालिकना हक लेकर कई मुकदमें चल रहे है।

मेट्रोपोल होटल में लगी आग

मेट्रोपोल होटल में लगी आग

जानकारी के अनुसार यह भवन पहले सेल टैक्स का कार्यालय होता था। वर्तमान में यह खाली पड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि होटेल की आग की लपटें दूर-दूर तक देखी गईं। भवन में आग लगता देख लोगों ने इसकी सूचना फायर बिग्रेड और पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड की गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। बता दें कि भवन के अलावा कोई अन्य हानि नहीं हुई है। आग लगने का कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधि बताया जा रहा है।

मोहम्मद अली जिन्ना अपनी पत्नी रतनबाई के साथ अप्रैल 1919 में इस होटल में रुके थे। ऐसा कहा जाता है कि जिन्ना नैनीताल की एक ही जगह पर बने मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे को देखकर काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने नैनीताल के सांप्रदायिक सौहार्द्र की तारीफ की थी। जिन्ना जब नैनीताल आए थे तब वह ज्यादा चर्चित नहीं थे। वह उस वक्त तक एक वकील और साधारण राजनेता थे। बता दें कि कई ऐतिहासिक किताबों में भी इस होटेल का जिक्र आ चुका है।

अप्रैल 1919 में पत्नी के साथ होटल आए थे जिन्ना

अप्रैल 1919 में पत्नी के साथ होटल आए थे जिन्ना

मोहम्मद अली जिन्ना अपनी पत्नी रतनबाई के साथ अप्रैल 1919 में इस होटल में रुके थे। ऐसा कहा जाता है कि जिन्ना नैनीताल की एक ही जगह पर बने मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे को देखकर काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने नैनीताल के सांप्रदायिक सौहार्द्र की तारीफ की थी। जिन्ना जब नैनीताल आए थे तब वह ज्यादा चर्चित नहीं थे। वह उस वक्त तक एक वकील और साधारण राजनेता थे। बता दें कि कई ऐतिहासिक किताबों में भी इस होटेल का जिक्र आ चुका है।

अपने दौर का सबसे बड़ा होटल था मेट्रोपोल

अपने दौर का सबसे बड़ा होटल था मेट्रोपोल

अपने दौर के सबसे बड़े 41 कमरे के मेट्रोपोल होटल का निर्माण मि. रेंडल नाम के अंग्रेज ने किया था। बाद में यह राजा महमूदाबाद की संपत्ति हो गई। देश की आजादी के बाद यह संपत्ति राजा के इकलौते चश्मो-चिराग राजा अमीर मोहम्मद खान के हिस्से आई, लेकिन इस पर अनेक लोगों का कब्जा रहा। इनमें से एक प्रमुख लूथरा 1995 तक इसे होटल के रूप में चलाते रहे। वर्ष 2005 में न्यायिक प्रक्रिया के बाद इसे प्रशासन द्वारा शत्रु संपत्ति घोषित कर तथा कब्जे छुड़वाकर राजा के हवाले कर दिया गया, लेकिन बाद में दो अगस्त 2010 को न्यायालय के आदेशों पर इसे वापस जिला प्रशासन ने बतौर कस्टोडियन कब्जे में ले लिया था।

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