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हीरोइन बनने के लिए बच्चे को छोड़ गई थी ट्रेन में, 40 साल बाद वही बेटा अपना हक मांगने HC पहुंचा

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मुंबई. आपने अब तक किसी मां के लिए उसके बेटे से मुआवजा या खर्च मिलने की बातें तो खूब सुनी होंगी, लेकिन क्या ऐसा भी सुना है कि बेटे ने एक मां से मुआवजा मांगा हो। यदि आपने ये खबर नहीं सुनी तो आज जानिए। मुंबई में, एक 40 साल का बेटा मां से अपना हक मांगने हाईकोर्ट पहुंच गया है। बीते सोमवार जस्टिस एके मेनन की अदालत में इस केस पर सुनवाई हुई। जिसमें बेटे ने मां से 1.5 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा।

जन्म देने के बाद छोड़ गई थी अकेला, 40 साल बाद सामने आया बेटा

जन्म देने के बाद छोड़ गई थी अकेला, 40 साल बाद सामने आया बेटा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस बेटे और मां के बीच विवाद की कहानी सालों पुरानी है। उसकी मां जब जवान थी और वह फिल्मों में काम करना चाहती थी। तकरीबन 38 साल पहले उसकी मां किसी शहर से हीरोइन बनने का ख्वाब पाले मुंबई के लिए निकली थी। उसके साथ उसका ढ़ाई-तीन साल का बच्चा भी था। उसका वही बच्चा, अब करीब 40 साल का हो चुका है, ने मां के बारे में कोर्ट में कहा है कि वह उसे ट्रेन में छोड़ गई थी।

बेटा जब ढ़ाई-तीन साल का था, तब मां हीरोइन बनने चली

बेटा जब ढ़ाई-तीन साल का था, तब मां हीरोइन बनने चली

महज ढ़ाई-तीन साल की उम्र में ही मां से बिछुड़ने पर बेटे की जिंदगी दर्द-भरी हो गई। उसने काफी मानसिक आघात सहे और परेशानियों का सामना किया। हालांकि, कुछ करीबियों की मदद से उसका ​भविष्य सुधरता रहा। वह मेक-अप आर्टिस्ट बन गया। अब लोग उसे श्रीकांत सबनीस के नाम से जानते हैं।

मुंबई में उसने दूसरे पुरुष से ब्याह कर लिया था

मुंबई में उसने दूसरे पुरुष से ब्याह कर लिया था

श्रीकांत सबनीस ने बतौर याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में कहा, जब 38 साल पहले उसकी मां ने मुझे किसी अनजान शहर में छोड़ दिया था। बाद में मुझे पता चला कि मेरी मां आरती महास्कर हैं। जो कि मुंबई में रहती हैं। उन्होंने दूसरी शादी कर ली। उदय महास्कर, उनके दूसरे पति यानी मेरे सौतेले पिता हैं। वे बड़े घर के हैं, यदि मेरी मां तब नहीं छोड़ती तो मैं भी कहां होता। अब मैं चाहता हूं कि वो मुझे एक बेटे के रूप में हक दें।''

1981 में वो बच्चे को लेकर मुंबई निकली थी

1981 में वो बच्चे को लेकर मुंबई निकली थी

श्रीकांत सबनीस ने यह भी कहा कि, मेरी मां यानी कि आरती महास्कर की शादी पहले दीपक सबनीस से हुई थी। वो दोनों पुणे में रहते थे, जहां फरवरी, 1979 में मेरा जन्म हुआ था। आरती बहुत महत्वाकांक्षी थी और मुंबई फिल्म उद्योग में काम करना चाहती थी। सितंबर, 1981 में वह अपने बच्चे (यानी मुझको) लेकर मुंबई चली आई। लेकिन मुंबई पहुंचने पर वह दो साल के श्रीकांत को ट्रेन में अकेला छोड़ गई। ट्रेन में रेलवे के अधिकारी की नजर उस पर पड़ी और उसने बालगृह में पहुंचा दिया।''

'2017 में पता चला कि मेरी मां कौन है'

'2017 में पता चला कि मेरी मां कौन है'

बाद में मेरी कस्टडी को लेकर लड़ाई चली और 1986 में फैसला मेरी नानी के हक में आया और उसके बाद मैं अपनी नानी के साथ रहने लगा। पहले अपनी दादी के साथ रहता था, लेकिन बाद में नानी के यहां पला-बढ़ा। साल 2017 में मुझे जन्म देने वाली अपनी मां के बारे में पता चला। किसी तरह मैंने अपनी मां का फोन नंबर हासिल किया और सिंतबर 2018 में फोन पर मां से बात हुई।''

'मां ने यह मान लिया कि ट्रेन में छोड़ गई थी'

'मां ने यह मान लिया कि ट्रेन में छोड़ गई थी'

मां ने यह तो माना कि मैं उसका बेटा हूं, यह भी बताया कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के चलते उसे उसको छोड़ना पड़ा था। लेकिन ​वह अब मिलना नहीं चाहती थी। तब मैंने वहीं जाकर मां और अपने सौतेले पिता से मुलाकात की। वहां उन दोनों ने कहा कि वो अपनी सच्चाई उनके बच्चों के सामने नहीं बताए। अपनी मां और सौतेले पिता की यह शर्त सुनकर पहले से ही मानसिक रूप से परेशान था, फिर मैं और ज्यादा परेशान हो गया।''

याचिका में कहा- मां मुझे बेटा घोषित करे

याचिका में कहा- मां मुझे बेटा घोषित करे

श्रीकांत सबनीस ने आगे कहा, मैंने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि मां को मुझे अपना बेटा घोषित करने और यह ऐलान करने का निर्देश दे कि उसने दो साल की उम्र में उसे छोड़ दिया था। मैंने बरसों तक मानसिक आघात सहा है और असुविधाओं को झेला है। माता-पिता होते हुए भी अनाथों की तरह रहा हूं। तब तक भिखारी की तरह जीना पड़ा, जब तक अपनी नानी के पास नहीं पहुंच गया।

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English summary
shrikant sabnis makeup artist story about his mother | A Man Files Plea in Bombay HC, Seeks Rs 1.5 Crore as Compensation from His Biological Mother
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