महाराष्ट्र भाजपा-शिवसेना की महाभारत!

अगले 90 दिनों बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। इससे पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचा है। सवाल है कि कौन बनेगा मुख्यमंत्री। महाराष्ट्र की सत्ता से दूर तड़प रही भाजपा में सत्ता की ललक झलक आने लगी है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री बनने को लेकर अपनी इच्छा मीडिया में जगजाहिर कर दी है। गत दिनों उद्धव ठाकरे मीडिया में यह कहते हुए दिखाई दिए थे कि भगवान विट्ठल की पूजा शिवसेना का मुख्यमंत्री करेगा। वहीं भाजपा अमित शाह को महाराष्ट्र विधानसभा की कमान सौंपने जा रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता यह अंदाजा लगा रहे हैं कि जिस तरह अमित शाह के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 80 में 71 सीटें जीत मिली है, उसी तरह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी अमित शाह का जादू चल जाएगा। लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा का मुख्यमंत्री दो-तीन तो नहीं हो सकते। बनाना किसी एक को ही पड़ेगा। ऐसे में महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के राजनेताओं के बीच महाभारत छिड़ना तय है। भाजपा को महाराष्ट्र का संभावित मुख्यमंत्री का नाम तय करने में परेशानी आ सकती है।
गोपीनाथ मुंडे थे प्रबल दावेदार
भाजपा की ओर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार गोपीनाथ मुंडे थे। लेकिन गोपीनाथ मुंडे नरेंद्र मोदी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री बन जाने के बाद केंद्र की राजनीति में आ गए थे। जिससे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की रेस से वे बाहर हो गए। इसके बाद माना जाने लगा था कि महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस का नाम बतौर मुख्यमंत्री सामने आ सकता है।
लेकिन गोपीनाथ मुंडे के होते हुए फड़नवीस के इस सपने पर पानी फिर सकता था। कुछ दिनों में गोपीनाथ मुंडे दुर्घटना में मारे गए। अब मुंडे के बाद रास्ते का एक कांटा तो दूर हो गया तो अब संभवतः नीतिन गडकरी या खुद अमित शाह अपना नाम बतौर मुख्यमंत्री आगे बढ़ा सकते हैं।
शिवसेना-भाजपा में हो सकती है राड़
महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन गत पच्चीस वर्षों से चलता आ रहा है। लेकिन दोनों ने कोई ऐसा काम नहीं किया जो जनता का मन लुभा सके। रही सही कसर शिवसेना के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी ने निकाल दी। कहीं पर आगजनी कर देना, हुड़दंग मचा देना। अब लगता है कि शिवसेना-भाजपा में अंदरूनी कलह पनप रही है। इस कलह की टीस पिछले दिनों प्रदेश भाजपा की बैठक में भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर शिवसेना से गठबंधन तोड़ने की मांग उठने से उजागर हो चुकी है।
तो वहीं शिवसेना प्रमुक उद्धव ठाकरे की ओर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर मीडिया में आए बयान से यह भी साफ हुआ है कि उद्धव ठाकरे अंदर ही अंदर मुख्यमंत्री बनने की महत्वकांशा पाले हुए हैं। सवाल है कि उनकी यह महत्वकांशा बीजेपी पूरी होने देगी या नहीं। हो न हो समय आने पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट सकता है। नहीं यह महाभारत यूं ही चलती रहेगी और जनता का हित कभी नहीं हो पाएगा।












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