मुंबई के धारावी में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले, कोविड-19 के केसों में फरवरी की तुलना में 62 फीसदी का उछाल
मुंबई के सबसे बड़े स्लम एरिया (गंदी बस्ती) धारावी में मार्च के महीने में अबतक कोरोना के 272 नए मामले सामने आ चुके हैं जो फरवरी में पाए गए कोरोना वायरस के 168 मामलों से 62 फीसदी ज्यादा हैं।
मुंबई। भारत में कोरोना ने एक बार फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। देश के अलग-अलग राज्यों से कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। मुंबई के सबसे बड़े स्लम एरिया (गंदी बस्ती) धारावी में मार्च के महीने में अबतक कोरोना के 272 नए मामले सामने आ चुके हैं जो फरवरी में पाए गए कोरोना वायरस के 168 मामलों से 62 फीसदी ज्यादा हैं। शुक्रवार को धारावी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
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2.5 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने अधिकारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वे पिछले साल की तुलना में (जब इस महामारी की शुरुआत हुई थी) इस साल बेहतर तरीके से तैयार हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इस साल फरवरी की शुरुआत से ही यहां कोरोना के केसों में वृद्धि शुरू हो गई थी और अब 19 मार्च तक यहां कोरोना के 272 मामले सामने आ चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि अब यह पूरे इलाके में फैल गया है और हर जगह से कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो धारावी में वर्तमान में कोरोना के 72 ऐक्टिव केस हैं। जबकि अब तक वहां कुल 4,133 कोरोना के केस मिले हैं, जिनमें से 3,745 लोग इस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं जबकि 316 लोगों की मौत हो चुकी है।
धारावी में 2,27,136 प्रति वर्ग किलोमीटर की जनसंख्या घनत्व के साथ लगभग 6.5 लाख लोग रहते हैं। 10 बाई 10 की खोली में परिवार के 8 से 10 लोगों के एक साथ रहने से सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में काफी दिक्कत आती है। यहां काफी संकरी गलिया हैं इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना बेहद कठिन काम है, जिसकी वजह से कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।
धारावी में कोरोना का पहला मामला पिछले साल 1 अप्रैल को सामने आया था। उसके ठीक बीस दिन बाद यहां कोरोना के मालले तेजी से बढ़े और इसे कोरोना हॉटस्पॉट घोषित किया गया। कोविड के बढ़ते मामलों को लेकर बीएमसी की सहायक नगर आयुक्त किरण दिघावकर ने कहा कि, 'हम इसको लेकर काफी सतर्क हैं और शुरुआती चरणों में ही मामलों का पता लगा रहे हैं ताकि मरीज को शुरुआती उपचार जल्दी दिया जा सके। आंकड़ों के अनुसार 70 प्रतिशत मामले असिम्टोमैटिक है जो या तो घर से जुड़े हुए हैं या संस्थागत हैं।'












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