बॉम्बे हाई कोर्ट में 22 साल बाद कोई महिला बनीं चीफ जस्टिस

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट के 154 साल के इतिहास में दूसरी बार कोई महिला चीफ जस्टिस की कुर्सी संभालेंगी। मंजुला चेल्लूर को इस पद की शपथ दिलाई जाएगी। 22 साल पहले पहली बार कोई महिला बॉम्बे हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं थीं।

जस्टिस चेल्लूर दो सप्ताह के अंदर पदभार संभाल लेंगी। न्याय विभाग ने उनका ट्रांसफर कोलकाता हाई कोर्ट से मुंबई हाई कोर्ट कर दिया।

महाराष्ट्र में बाहर की पहली महिला चीफ जस्टिस चेल्लूर

1978 में मंजुला चेल्लूर पहली महिला थीं जिन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी। वह बाद में कोलकाता हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं।

मंजुला बॉम्बे हाई कोर्ट की पहली ऐसी महिला चीफ जस्टिस होंगी जो महाराष्ट्र से बाहर की हैं।

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सुजाता मनोहर थीं बॉम्बे हाई कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस

60 साल की मंजुला के चीफ जस्टिस पद पर नियुक्ति से 22 साल पहले सुजाता मनोहर पहली महिला थीं जिन्होंने इस पद को संभाला था।

मुंबई की सुजाता मनोहर ने 1958 में वकील पेशे की प्रैक्टिस शुरू की थी। बाद में 1978 में वह बॉम्बे हाई कोर्ट की पहली महिला जज बनीं। सुजाता 1994 में बॉम्बे हाई कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं।

तीन महीने के बाद उनका ट्रांसफर केरल हाई कोर्ट कर दिया गया। उसके बाद सुजाता सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं जहां वह अगले 5 साल तक काम करती रहीं।

24 हाई कोर्ट में सिर्फ दो महिला चीफ जस्टिस

फिलहाल मंजुला के अलावा गोरला रोहिणी दिल्ली हाई कोर्ट की महिला चीफ जस्टिस हैं। भारत में 24 हाई कोर्ट हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 28 जजों में सिर्फ एक महिला हैं। जस्टिस आर भानुमति जो झारखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस थीं, उनको 2014 में सुप्रीम कोर्ट भेज दिया गया।

चेल्लूर के पास सिर्फ 18 महीने

चीफ जस्टिस चेल्लूर के पास इस पद पर काम करने के लिए सिर्फ 18 महीने हैं। वह 2017 के दिसंबर में रिटायर होंगीं। अगर उनको भी सुप्रीम कोर्ट भेजा जाता है तब वह 65 साल में रिटायर होंगी।

ट्रांसजेंडर के लिए काफी कर चुकीं हैं चेल्लूर

चेल्लूर अपने संवेदनशील और विनम्र स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। वह मानवाधिकार मामलों की ज्ञाता हैं और उन्होंने ट्रांसजेंडर्स के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कानून बनने से पहले से ही काफी काम किया है।

'कोई इंसान कानून से ऊपर नहीं'

राज्य सभा के डिप्टी चेयरपर्सन के खिलाफ रेप केस मामले में केरल हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने कहा था कि कोई इंसान कानून से ऊपर नहीं है। जस्टिस चेल्लूर 2012 से 2014 के बीच केरल हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रहीं।

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