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मिडडे मील में नमक-रोटी का वीडियो बनाने वाले पत्रकार पर केस के विरोध में बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई

मिर्जापुर। यूपी में मिर्जापुर के जमालपुर ब्लाक के शिऊर प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को खाने में नमक-रोटी दिए जाने का खुलासा करने वाले पत्रकार के खिलाफ कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। पत्रकार पर फर्जी खबर चलाने और अफवाह फैलाने के केस दर्ज करा दिए। वहीं, बदहाली का सच सामने लाने वाले पत्रकार के समर्थन में स्कूली बच्चे और उनके अभिभावक विरोध-प्रदर्शन करने लगे हैं। यहां प्रधान प्रतिनिधि और पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में बच्चे स्कूल नहीं आए। विद्यालय खुला और शिक्षक भी आए। मगर, विद्यालय में पढ़ने के लिए छात्र नहीं आए। विद्यालय में सिर्फ एक छात्र पहुंचा, जिसने पढ़ाई भी की और खाना भी खाया।

बच्चों को स्कूल में ​​खिलाया जाता था घटिया खाना

बच्चों को स्कूल में ​​खिलाया जाता था घटिया खाना

यूपी में पत्रकार के खिलाफ सरकारी अधिकारियों के भड़कने का यह मामला 'नमक-रोटी प्रकरण' के तौर पर चर्चित हो रहा है। भ्रष्टाचार उजागर करने में लगे पत्रकार पवन जायसवाल एवं हिनौता ग्रामसभा के प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पवन जायसवाल का कहना है कि हमने स्कूल में बांटे जा रहे नमक-रोटी वाली घटना की बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। जिसके बाद डीएम को कुछ लोगों पर कार्रवाई करनी पड़ी। मगर, वे लोग अब हमारे पीछे पड़ गए हैं।'

गांववालों ने अपने बच्चों को स्कूल जाने से रोका, एक बच्चा ही आया

गांववालों ने अपने बच्चों को स्कूल जाने से रोका, एक बच्चा ही आया

वहीं, जब पत्रकार पवन जायसवाल पर केस कर दिया गया, तो इसके विरोध में नाराज ग्रामीणों ने अपनें बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया। जिससे 95 बच्चों के नामांकन के बाद भी सिर्फ एक छात्र विद्यालय में पढ़ने आया। बच्चो के विद्यालय में नहीं आने पर शिक्षक भी विद्यालय बंद कर जाने लगे। हालांकि, विद्यालय में आए कक्षा एक के छात्र सुखराम की वजह से स्कूल चालू रहा। तब विद्यालय में आए दो शिक्षकों ने मिलकर अकेले छात्र को पढ़ाया। निर्धारित समय से बच्चे को एमडीएम भी खाने को दिया गया। सुखराम ने खाया और बताया कि उसने रोटी और दाल विद्यालय में खाया है। साथ ही साथ अकेले ही पढ़ाई भी की।

गांववालों ने कहा- पत्रकार निर्दोष, उससे केस वापस लें

गांववालों ने कहा- पत्रकार निर्दोष, उससे केस वापस लें

विद्यालय में नए शिक्षक को संबद्ध किए जाने से शिक्षक किसी अभिभावक के घर नहीं पहुंच पाए। अब आठ कक्षाओं वाला सियुर विद्यालय बच्चों के बिना सूना नजर आ रहा था। इस दौरान कुछ ग्रामीणों का आरोप था कि जब तक रोटी नमक प्रकरण में दर्ज मुकदमा वापस नहीं होगा, तबतक बच्चे विद्यालय में पढ़ने नहीं जाएंगे।

बदले हालात से एबीएसए और शिक्षक परेशान

बदले हालात से एबीएसए और शिक्षक परेशान

शिऊर स्थित प्राथमिक विद्यालय में गुरुवार को 95 बच्चो में सिर्फ एक छात्र पढ़ने आया। बदले हालात को देख शिक्षकों के माथे पर बल पड़ने लगा। इसकी जानकारी उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिया। एबीएसए के नेतृत्व में दर्जनों शिक्षक विद्यालय पहुंच गए।

शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए

शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए

अभिभावकों के घर पहुंच कर जब बच्चो को स्कूल भेजने के लिए कहा गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया पहले मुकदमा वापस लें, फिर बच्चे स्कूल जाएंगे। जिसे सुनकर एबीएसए और शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए।

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