मऊ में भूत प्रेत के डर से पट्टीदारों में जमकर हुई मारपीट, कहा- उनकी बहू को करता है परेशान
अंधविश्वास एक ऐसा विश्वास है, जिसका कोई उचित कारण नहीं होता है। अंधविश्वास का मामला हमारे देश में आज भी लोगो को प्रभावित कर रहा हैं। भूत प्रेत तंत्र मंत्र की बहुत सारी खबरें आपने देखी भी होंगी लेकिन उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में भूत प्रेत से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है जिसको सुनने के बाद आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। यहाँ भूत प्रेत के चक्कर में दो पट्टीदारो मे जम के मारपीट हो गई। मारपीट इस कदर हुई कि एक महिला को जिला अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ गया।

पोता भूत बनकर चोरी चोरी घर में आता है
दरअसल पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में घोसी थाना क्षेत्र का है। पीड़ित महिला का नाम पार्वती मौर्य है, उनके अनुसार 4 महीने पहले उनके पोते की मौत हो गई थी। उनका कहना है कि 'हमारा पोता बाजार सामान लेने गया था और वह वापस नहीं लौटा और अगले दिन हमारे पोते का शव पेड़ से लटकता हुआ मिला था। जिसके बाद उनके पट्टीदारो ने उन्हें परेशां करना शुरू कर दिया। अब करीब 4 महीने के बाद हमारे पट्टीदारो के द्वारा कहा जाने लगा कि हमारा पोता भूत बनकर चोरी चोरी घर में आता है और उनकी बहू को परेशान करता है। इसी बात को लेकर हमारे साथ मारपीट की है, जिसमे हम घायल हो गए। इस मामले की शिकायत हमने पुलिस में की है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अज्ञानता है अंधविश्वास का श्रोत
एक छोटा बच्चा अपने घर, परिवार एवं समाज में जिन परंपराओं, मान्यताओं को बचपन से देखता एवं सुनता आ रहा होता है, वह भी उन्हीं का अक्षरशः पालन करने लगता है। यह अंधविश्वास उसके मन-मस्तिष्क में इतना गहरा असर छोड़ देता है कि जीवनभर वह इन अंधविश्वासों से बाहर नहीं आ पाता। अंधविश्वास अधिकतर कमजोर व्यक्तित्व, कमजोर मनोविज्ञान एवं कमजोर मानसिकता के लोगों में देखने को मिलता है। जीवन में असफल रहे लोग अधिकतर अंधविश्वास में विश्वास रखने लगते हैं एवं ऐसा मानते हैं कि इन अंधविश्वासों को मानने एवं इन पर चलने से ही शायद वह सफल हो जाएं।
अंधविश्वास सच्चाई और वास्तविकता से बहुत दूर होते हैं। अंधविश्वास में व्यक्ति आलौकिक शक्तियों में विश्वास करता है। शक्तियों के अस्तित्व में विश्वास रखता है, जो कि प्रकृति के नियमों की पुष्टि नहीं करता है और न ही ब्रह्मांड की वैज्ञानिक समझ रखता है। अंधविश्वास व्यापक रूप से फैला हुआ है।

अंधविश्वास से रहें सावधान
अंधविश्वास न केवल अशिक्षित एवं निम्न आय वर्ग के लोगों में देखने को मिलता है, बल्कि यह काफी शिक्षित, विद्वान, बौद्धिक, उच्च आय वर्ग एवं विकसित देशों के लोगों में भी कम या ज्यादा देखने को मिलता है। यह आमतौर पर पीढ़ी दर पीढ़ी देखने को मिलता है। अंधविश्वास समाज, देश, क्षेत्र, जाति एवं धर्म के हिसाब से अलग-अलग तरह के होते हैं। विभिन्न प्रकार के अंधविश्वास आमतौर पर समाज में देखने को मिलते हैं, जैसे आंख का फड़कना, घर से बाहर किसी काम से जाते समय किसी व्यक्ति द्वारा छींक देना, बिल्ली का रास्ता काट जाना, हथेली पर खुजली होना, काली बिल्ली में भूत-प्रेत का वास होना, मुंह देखने वाले शीशे का टूटना, कंधे के पीछे नमक फेंकना, मासिक धर्म के दौरान महिला को अपवित्र मानकर उसके मंदिर में प्रवेश को वर्जित करना, श्राद्ध के दिनों में नया काम शुरू न करना या नए कपड़े न सिलवाना आदि।
ऐसे अंधविश्वास से बचा बेहद ही जरूरी है। अपने अंधविश्वास से संबंधित विश्वास को करने की प्रबल इच्छा को नजरअंदाज करना सीखें। आपको पता होना चाहिए कि अंधविश्वास केवल तब कार्य करता है, जब आप उसके निहित आकर्षण एवं शक्ति में विश्वास करते हैं। अगर कोई आपसे कहता है कि इन अंधविश्वासों में सच्चाई है, तब आप उससे कहिए कि वह इन अंधविश्वासों की सच्चाई को साबित करके दिखाए।












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