कुदरत का कहर! कहीं फसल नष्ट होने के सदमे में किसान की मौत तो कहीं हुई इंद्र देव को मनाने की कोशिश
कहतें हैं कि कुदरत के कहर से कोई नहीं बच सकता। मथुरा में 3 दिन पूर्व हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिसने हर किसी के मन को झंझोड़ कर रख दिया है।

पिछले दिनों उत्तर भारत में जिस प्रकार मौसम ने अपना मिजाज बदला था, उसने कहीं मछवारों को अपनी चपेट में ले लिया तो कहीं किसानों की फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया। जहाँ 3 दिन पहले सोनभद्र में कुदरत के कहर ने 5 लोगों की जान ले ली थी, जहां पहाड़ी नदी घाघर में मछली मार रहे 6 लोग तेज बहाव के चलते बह गए थे। वहीं मथुरा में 3 दिन पूर्व हुई बारिश ओलावृष्टि ने किसानों की 40 से 50 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई। कहीं मजबूर किसान खेतों में राधा रानी की तस्वीर लेकर बैठ गया और इंद्र देवता को मनाने की कोशिश करने लगा तो कहीं एक किसान अपनी गेहूं की फसल नष्ट होते देख सदमे में उसकी मौत हो गई।

खेतों में राधा रानी की तस्वीर लेकर बैठ गया किसान
दरअसल, मथुरा में 3 दिन पूर्व हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है। मथुरा में अचानक मौसम की मार से किसानों की 40 से 50 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है। यह तस्वीर है मथुरा के छाता इलाके की, जहां मौसम की मार से अपनी फसलों को नष्ट होते देख किसान खेतों में राधा रानी की तस्वीर लेकर बैठ गया और इंद्र देवता को मनाने की कोशिश करने लगा। जब उसे कोई रास्ता नहीं दिखा तो उसने भगवान के आगे अपनी झोली फैला दी। ये तस्वीर वाकई दिल को झंझोड़ कर रख देने वाली है।

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फसल नष्ट होने के सदमे में किसान की मौत
वही चौमुहा के सेंधवा गांव में एक किसान अपनी गेहूं की फसल नष्ट होते देख सदमे में आ गया। उसको अपनी फसल नष्ट होने का सदमा इस कदर लगा कि उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पप्पू नामक किसान की 4 बीघा गेहूं की फसल बारिश और ओलावृष्टि से नष्ट हो गई। जिसे यह किसान सहन नहीं कर सका और उसकी उपचार के दौरान ले जाते हुए मौत हो गई। जानकारी अनुसार मथुरा में किसान पूरी तरह से ओलावृष्टि में फसलें नष्ट हो जाने से तबाही के कगार पर पहुंच गया है। शासन के निर्देश पर नष्ट हुई फसलों का आंकलन किया जा रहा है, लेकिन ये वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो गया है।












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