Veer Savarkar: वीर सावरकर की अग्रेंजों ने क्यों छीन ली थी बैरिस्टर की डिग्री? अब महाराष्ट्र सरकार कराएगी बहाल
Veer Savarkar barrister degree: मां भारती के वीर सपूत विनायक दामोदर सावरकर की आज 28 मई 2025 को देश भर में जयंती मनाई जा रही है। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की अलख जगाने वाले स्वतंत्रता सेनानी सावरकर साहस का वो दीपक है, जो अंधेरे में दिशा दिखाता है। क्रांतिकारी वीर सावरकर को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है "स्वत्रंतता सेनानी वीर सावरकर की बैरिस्टर डिग्री, जो अग्रेंजों ने छीन ली थी उसे बहाल करने का औपचारिक प्रयास किया जाएगा और उन्हें मरणोपरांसत बैरिस्टर की उपाधि प्रदान की जाएगी। आइए जानते हैं, वीर सावरकर ने कहां से पढ़ाई की थी और आखिर क्यों अंग्रेजों ने उनकी बैरिस्टर की डिग्री छीन ली थी?

वीर सावरकर ने कहां से की थी पढ़ाई?
स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर ने नासिक के शिवाजी हाईस्कूल की पढ़ाई की थी। इसके बाद पुणे के फर्ग्युसन कालेज से बीए की डिग्री हासिल की और आगे की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए थे। लंदन के ग्रेज इन लॉ कालेज से बार-एट-लॉ का एग्जाम पास किया था। परीक्षा पास कर लेने के बाद भी उनकी राजनीतिक सक्रियता के कारण सावरकर को बार में प्रवेश नहीं मिला।
क्यों अंग्रेजों ने सावरकर की बैरिस्टर की डिग्री छीन ली थी?
लंदन के ग्रेज इन से सावरकर ने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी कर ली थी लेकिन उन्हें बैरिस्टर की उपाधि नहीं दी गई। इसकी वजह थी कि सावरकर ने ब्रिटिश राज के प्रति निष्ठा की शपथ लेने से इनकार कर दिया था। अंग्रेजों ने अपने पत्र में वीर सावरकर को सबसे खतरनाक क्रांतिकारी करार देते हुए उनकी बैरिस्टर की डिग्री छीन ली थी।
महाराष्ट्र सरकार सावरकर को दिलवाएगी मरणोपरांत 'बैरिस्टर' उपाधि
महाराष्ट्र सरकार ने देशभक्त सावरकर की बैरिस्टर की उपाधि उन्हें मरणोपरांत दिलाने की ठानी है। सीएम फडणवीस ने मुंबई विश्वविद्यालय में शुरू हुए 'स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर अध्ययन एवं शोध केंद्र' के उद्घाटन के अवसर पर ये ऐलान किया है। सीएम फडणवीस ने कहा, "वीर सावरकर की बैरिस्टर की डिग्री वापस लेने के लिए बिट्रिश सरकार से पत्रचार करेगी।" इसके साथ ही सीएम ने विश्वविद्यालय को इस पहल का समर्थन करने के लिए एक विस्तृत डोजियर तैयार करने का भी निर्देश दिया है।
कौन थे वीर सावरकर?
युवाओं में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले वीर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक के भगूर में 28 मई 1883 को हुआ था। वीर सावरकर और स्वातन्त्रयवीर के नाम से विख्यात सावरकर ने 9 साल की आयु में अपनी मां और 16 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। बड़े भाई गणेश ने उनकाल लालन-पालन किया था। लंदन में रहकर उन्होंने पहली किताब "1857 का भारतीय स्वतंत्रता का संग्राम" लिख कर आजादी की लड़ाई की शुरूआत की।
ये भी पढ़ें- Savarkar Jayanti 2025: जब पुलिस की निगरानी में दरवाजा खोलकर सावरकर को जाना पड़ता था टॉयलेट, क्या है ये किस्सा?
वीर सावरकर को क्यों दी गई थी काला पानी की सजा?
17 जनवरी, 1910 में मॉन्टगोमरी की अदालत में सावरकर के खिलाफ केस दर्ज हुआ और उन्हें 1909 में नासिक कलेक्टर जेक्सन की हुई हत्या का षड्यंत्र रचने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने 1911 में आजीवन कारावास की सज़ा दी और अंडमान की सेलुलर जेल (काला पानी) भेज दिया। यहां सावरकर भीषण मानवीय यातनाएं दी गई।
कुल 9 साल 10 महीने सेक्यूलर जेल में बिताने के बाद 1924 में सशर्त उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद सावरकर को महाराष्ट्र की रतनगिरी और यरवदा जेल में रखा गया। यहां पर ही सावरकर ने 'Who is a Hindu' नाम की किताब लिखी। 26 फरवरी 1966 को विनायक दामोदर सावरकर ने उपवास कर देश की आजादी के लिए प्राण न्यौछावर कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications