नाम-चुनाव चिह्न खोने के बाद उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख, ECI के फैसले को देगा चुनौती

shiv sena news: चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना घोषित करते हुए चुनाव चिन्ह भी सौंप दिया था। ईसी के इस फैसले के खिलाफ उद्धव गुट अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा।

Uddhav Thackeray

shiv sena news: उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। पहले तो एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने उद्धव ठाकरे से न केवल सत्ता छीन ली, बल्कि अब उनसे उनके पिता बालासाहेब ठाकरे की पार्टी शिवसेना का नाम और उसका चुनाव चिन्ह भी छीन लिया। दरअसल, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना घोषित करते हुए 'धनुष और तीर' का चुनाव चिन्ह भी उन्हें सौंप दिया था।

चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट ने भी सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर लिया है। उद्धव ठाकरे गुट आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे गुट को दिए जाने वाले चुनाव आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग करेगा। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, उद्धव गुट की ओर से चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए आज ही ऑनलाइन याचिका दाखिल कर 20 फरवरी को अर्जेंट सुनवाई की गुहाल लगाई जाएगी।

इतना ही नहीं, उद्धव गुट चुनाव आयोग के आदेश को दोषपूर्ण बताते हुए इस पर स्टे लगाने की गुहार सुप्रीम कोर्ट में लगाने की निर्णय लिया है। उद्धव गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें देने वाले सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के मुताबिक, याचिका में निर्वाचन आयोग के आदेश में कानूनी खामियों के आधार पर फैसले को चुनौती दी जाएगी। उद्धव ठाकरे के गुट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि शिवसेना के संविधान में संशोधन अलोकतांत्रिक है, जो कि गलत है।

कहा कि शिवसेना के संविधान में बदलाव एकतरफा था यानी लोकतांत्रिक तौर पर बहुमत की सहमति से संशोधन नहीं किया गया था। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2022 में एकनाथ शिंदे की बैठक में चुनाव आयोग द्वारा उसी संविधान को स्वीकार किया गया था। उद्धव खेमे ने दावा किया है कि चुनाव आयोग का आदेश असंगत है और चूंकि शिंदे समूह संगठनात्मक पक्ष में कमजोर था, इसलिए चुनाव निकाय ने जानबूझकर पार्टी के संविधान को अलोकतांत्रिक बताया है और इसे बहुमत के आधार पर तय करने के लिए अलग रखा है।

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    उद्धव गुट का ये भी कहना है कि उसे आधार और आंकड़ों में क्यों नहीं शामिल किया गया? आखिर वो वोट भी तो जनता ने ही दिए थे। इसके अलावा भी कई ऐसे तकनीकी बिंदु और कानूनी पेंच हैं जिनको अर्जी का आधार बनाया गया है। उद्धव गुट का दावा है कि संगठन में शिंदे गुट कमजोर था और इसी वजह से बहुमत से फैसला लेने के लिए चुनाव आयोग ने उनकी ओर से पार्टी संविधान में बदलाव को अलोकतांत्रिक घोषित कर दिया जिससे इसे किनारे किया जा सके।

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