Sharad Pawar Political Career: हर कोई नहीं बन सकता शरद पवार, 66 साल से राजनीति में, 4 बार CM, 6 बार MP
Sharad Pawar Biography in Hindi: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में आज 20 नवंबर को सभी 288 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार के महाराष्ट्र चुनाव के बाद दिग्गज नेता शरद पवार राजनीति छोड़ देंगे? क्या साल 2024 में शरद पवार आखिरी बार सक्रिय रूप से नजर आ रहे हैं?
साल 1958 से लेकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 तक बारामती व महाराष्ट्र की राजनीति शरद पवार के ईद-गिर्द ही घूमती रही है। 66 साल बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार की राजनीतिक यात्रा पर ब्रेक लग सकते हैं। पिछले दिनों ऐसे संकेत खुद शरद पवार ने दिए।
महाराष्ट्र में सरकार किसी की भी रही हो, मगर यहां की सियासत में शरद पवार 'फैक्टर' हमेशा ही सबसे अहम माना जाता रहा है। यह कहना गलता नहीं होगा कि राजनीति में 'शरद पवार' बनना इतना आसान नहीं। एनसीपी-एसपी चीफ शरद पवार के राजनीति छोड़ने की अटकलों के बीच उनके सियासी सफर पर एक नजर।

शरद पवार ने राजनीति में कदम कब रखा?
महाराष्ट्र के बारामती में 12 दिसंबर 1940 को जन्मे शरद पवार का पूरा नाम शरदचंद्र गोविंदराव पवार है। साल 1967 में प्रतिभा पवार से शादी हुई। बेटी का नाम सुप्रीया सुले है। महज 18 साल की उम्र में ही शरद पवार ने राजनीति में कदम रख दिया था। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1958 में यूथ कांग्रेस ज्वाइन की। पुणे जिले के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने। साल 1964 में इन्हें महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का सचिव बनाया गया।
शरद पवार साल 1967 में पहली बार MLA बने
महाराष्ट्र की राजनीति में छह दशक से सक्रिय शरद पवार चार महाराष्ट्र मुख्यमंत्री रहे हैं। बारामती से छह बार विधायक व छह बार सांसद चुने जा चुके हैं। केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। शरद पवार बारामती से साल 1967 में महज 27 साल की उम्र में पहली बार कांग्रेस विधायक बने। फिर बारामती विधानसभा चुनाव 1972, 1978, 1980, 1985, 1990 में जीत दर्ज की। शरद पवार को 70 के दशक की शुरुआत में पहली बार कैबिनेट बर्थ मिला जब वसंतराव नाइक की सरकार में उन्हें गृह मंत्री बनाया गया था।
शरद पवार सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने
साल 1978 में शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के सीएम बने। तब इनकी उम्र महज 38 साल थी। शरद पवार साल 1988 में दूसरी बार, 1990 में तीसरी बार और साल 1993 में चौथी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।
शरद पवार कब-कब सांसद बने?
शरद पवार पहली बार साल 1984 में बारामती लोकसभा क्षेत्र से भारतीय कांग्रेस (समाजवादी) की टिकट पर सांसद बने। इसके बाद शरद पवार ने साल 1991, 1996, 1998, 1999 व 2004 में बारामती से लोकसभा चुनाव जीता। केंद्र में पी.वी. नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में रक्षा मंत्री और मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री के रूप में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कार्य किया है।
शरद पवार ने क्यों बनाई एनसीपी?
शरद पवार ने 10 जून 1999 को कांग्रेस अलग होकर 10 जून 1999 को Nationalist Congress Party (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) की नींव रखी। पार्टी को घड़ी का सिंबल मिला। एनसीपी की स्थापना के पीछे की कहानी ये है कि लोकसभा चुनाव 1999 में कांग्रेस नेता शरद पवार, पीए संगना और तारिक अनवर ने पार्टी में यह मांग रखी थी कि इटली में जन्मी सोनिया गांधी की बजाय किसी भारत में जन्मे व्यक्ति को पीएम पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। इस मांग की वजह से सीडब्ल्यूसी ने शरद पवार समेत तीनों नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। तब शरद पवार ने खुद की पार्टी राकांपा बना ली।
शरद पवार की एनसीपी क्यों टूटी?
शरद पवार के भाई अनंतराव पवार के बेटे अजित पवार ने चाचा की छत्रछाया में रहकर राजनीति सीखी। भतीजे ने चाचा की सियासी विरासत संभाली और बारामती सीट से 1991 से लेकर 2019 तक विधायक चुने गए। अजित पवार पांच बार महाराष्ट्र डिप्टी सीएम की कुर्सी पर विराजे। हालांकि सीएम कभी नहीं बन पाए।
साल 2023 आने तक चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार के सियासी रिश्ते खराब हो गए और परिवार में विरासत की लड़ाई शुरू हो गई, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के टूटने की वजह बनी। भतीजे अजित पवार ने चाचा शरद पवार से बगावत कर दी और महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन का हिस्सा बन गए, जिसमें भाजपा व एकनाथ शिंदे शिवसेना भी है।
चाचा से अलग होने के बाद भतीजे ने उनसे पार्टी का सिंबल और नाम छीन लिया। अब एनसीपी के दो गुट हैं। एक शरद पवार और दूसरा अजित पवार। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा शरद पवार एनसीपी 87 और महायुति को हिस्सा अजित पवार एनसीपी 52 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं। सभी पर एक चरण में 20 नवंबर को मतदान व 23 नवंबर को मतगणना है।
शरद पवार ने राजनीति छोड़ने का क्या संकेत दिया?
बारामती विधानसभा चुनाव 2024 में शरद पवार ने अजित पवार के सामने उनके भतीजे युगेंद्र पवार को उतारा है। बारामती के सुपा में आयोजित चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि 'राज्यसभा की सदस्यता का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद क्या उन्हें एक बार फिर से उच्च सदन में जाना चाहिए या नहीं? नए नेतृत्व को आगे आना चाहिए।' शरद पवार के इस बयान के मायने यह निकाले जा रहे हैं कि वे राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं।
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