राज ठाकरे की MNS ने चुनाव में उद्धव ठाकरे को सीटें जीतने में की मदद, नहीं तो शिवसेना (यूबीटी) का होता ये हाल
Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने बहुत ही खराब प्रदर्शन किया। एक भी सीट पर खाता नहीं खोल पाई। इस बार का चुनाव अकेले दम पर लड़ने वाले राज ठाकरे की पार्टी ने 125 उम्मीदवार मैदान में उतारे लेकिन एक पर भी जीत हासिल नहीं की। यहां तक कि महिम सीट से राज के बेटे अमित ठाकरे भी अपना पहला चुनाव हार गए।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बुरी हार का सामना करने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने कट्टर विरोधी होने के बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को सीटें जीतने में महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। अगर राज ठाकरे की पार्टी ना होती तो उद्धव ठाकरे को इस चुनाव में और बुरी हार का सामना करना पड़ता। आइए जानते हैं कैसे?

बता दें शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की है जिसमें से से 10 सीटें ऐसी हैं जहां पर राज ठाकरे की मनसे उम्मीदवारों खड़े थे और इन निर्वाचन क्षेत्रों में मनसे वोटकटुआ बनकर ठाकरे शिवसेना और शिंदे शिवसेना के बीच जीत के अंतर को काफी हद तक प्रभावित किया।
इन 10 सीटों में 8 मुंबई की सीटें हैं और दो राज्य के अन्य हिस्सों की है। इन 10 सीटों पर मनसे के उम्मीदवारों की भागीदारी दोधारी तलवार साबित हुई, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) को फ़ायदा पहुंचा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना और महायुति गठबंधन की संभावित सीटों की संख्या में अप्रत्यक्ष रूप से कमी आई।
अगर मनसे ना होती तो उद्धव ठाकरे की पार्टी का होता ये हाल
अगर इस चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी के उम्मीदवारों की भागीदारी ना होती तो साफ है कि शिवसेना (यूबीटी) को केवल 10 सीटें ही मिल पातीं, जिससे चुनावी नतीजों में काफ़ी बदलाव आता और संभवतः एकनाथ शिंदे गुट को 10 अतिरिक्त सीटें मिल जातीं।
जानिए वो सीटें जो उद्धव की सेना ने मनसे के कारण जीती?
मनसे के उम्मीदवार जिन सीटों पर विरोध में खड़े होकर ठाकरे शिवसेना के लिए मददगार बने उन सीटों में मुंबई में माहिम, वर्ली और वांद्रे ईस्ट जैसी खास सीटें निर्णायक युद्धक्षेत्र थीं। इन क्षेत्रों में मनसे उम्मीदवारों को प्राप्त वोट निर्णायक थे। जिसके कारण मुंबई शहर में शिवसेना (यूबीटी) का प्रभुत्व बनाए रखने में उद्वव को मदद मिली।
वोटकटुआ बने मनसे, शिंदे को हुआ नुकसान?
उदाहरण के तौर पर माहिम में, शिवसेना (यूबीटी) के महेश सावंत ने 1,316 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जिसमें राज ठाकरे के बेटे और मनसे के उम्मीदवार अमित ठाकरे को 33,062 वोटों मिले। वर्ली सीट पर आदित्य ठाकरे की जीत 8,801 वोटों के अंतर से हुई, जिसमें मनसे के संदीप देशपांडे को 19,367 वोटों मिले।












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