महाराष्ट्र चुनाव 2019: जानिए घाटकोपर वेस्ट विधानसभा सीट के बारे में
मुंबई। महाराष्ट्र में नई सरकार के चुनाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। महाराष्ट्र की 288 सीटों के लिए वोटिंग 21 अक्टूबर को कराए जाएंगे और 24 अक्टूबर को मतगणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि सत्ता की चाबी जनता ने किसको थमाया। सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में जोरशोर से जुटी हैं। सूबे के सियासी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। शिवेसना के लिए उद्धव और आदित्य ठाकरे प्रचार कर रहे हैं तो वहीं भाजपा के लिए देवेंद्र फडणवीस मैदान में हैं। एनसीपी के लिए पवार परिवार मैदान में है तो कांग्रेस भी अपने बड़े चेहरों को उतार चुकी है। हम आपको महाराष्ट्र की अलग-अलग विधानसभा सीटों के बारे में बता रहे हैं। इस सीट के सियासी इतिहास के साथ-साथ इस एरिया की दूसरी खास बातें भी हम आपको बताएंगे। तो आइए आपको बताते हैं विले घाटकोपर वेस्ट सीट के बारे में।

घाटकोपर मुंबई सबअर्बन जिले का हिस्सा है जो कि मुंबई नॉर्थ ईस्ट लोकसभा क्षेत्र में आता है। 2009 में यहां से मनसे के राम कदम को जीत मिली थी। 2014 के चुनाव से पहले राम कदम भाजपा में शामिल हो गए थे। माना जाता है कि घाटकोपर का नाम 'घाट' शब्द से आया है क्योंकि इस इलाके में कई घाट हैं। घाटकोपर में अभी तक दो बार विधानसभ चुनाव हो चुके हैं। इस बार भी भाजपा यहां से चुनाव जीतने की उम्मीद कर सकती है। राम कदम ने शिवसेना के सुधीर सयाजी मोर को 41,916 वोटों के अंतर से हराया था। राम कदम को 80,343 वोट मिले थे जबकि सुधीर सयाजी मोर को 38,427 वोट मिले थे। साल 2009 में भी राम कदम ने ही यहां से जीत हासिल की थी लेकिन उस वक्त वो मनसे में थे। 2009 में उन्होंने बीजेपी के पूनम महाजन राव को हराया था।
गलत उच्चारण से नाम हुआ घाटकोपर
घाटकोपरयहां पर एक घाट था जिसके ऊपर गांव बसा था। इसलिए इसका नाम घाट के ऊपर से घाटकोपर बन गया। इसका मतलब है कि गलत उच्चारण की वजह से इसका नाम भी घाट के ऊपर से घाटकोपर पड़ा।
महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को है मतदान
288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा 122 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। जबकि 25 सालों के बाद बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ने वाली शिवसेना के 63 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 42 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बाकी 13 सीटें छोटे दलों के खाते में गई थी, वहीं 7 निर्दलीय विधायक भी चुने गए थे।
चुनाव नतीजों से स्पष्ट था कि कोई भी दल बहुमत के करीब नहीं था। इसके बाद अलग-अलग चुनाव लड़ने वाली बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस चुनाव में सभी प्रमुख दलों ने अकेले चुनाव लड़ा था, ना भाजपा और शिवसेना का गठबंधन हुआ था और ना ही कांग्रेस और एनसीपी के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन हो पाया था। राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 21 अक्टूबर को मतदान होगा। आपको बता दें कि चुनाव प्रक्रिया 27 अक्टूबर तक पूरी कर ली जायेगी। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल नौ नवम्बर 2019 को समाप्त हो रहा है।












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