पंढरपुर वारी यात्रा में शामिल होंगे राहुल गांधी, जानें अचानक से ये धार्मिक यात्रा क्यों हो गई है अहम?
Maharashtra Pandharpur yatra: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) लोकसभा में विपक्ष के नेता की नई भूमिका में आ चुके हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली शानदार जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद राहुल गांधी पहले से कहीं अधिक जोश और आक्रामक नजर आ रहे हैं।
'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान देश भर का दौरा कर लोगों के दिलों में घर बनाने में कामयाब राहुल गांधी अब महाराष्ट्र की प्रसिद्ध धार्मिक पंढरपुर वारी यात्रा में शामिल होने का ऐलान किया है। आइए जानते हैं आखिर क्या वजह है जो महाराष्ट्र की ये धार्मिक यात्रा अचानक से राजनीति तौर पर इतनी अहम क्यों हो गई है?

तीर्थयात्रियों के साथ राहुल गांधी करेंगे पदयात्रा
राहुल गांधी पंढरपुर की वारी तीर्थयात्रा में 13-14 जुलाई को शामिल होने वाले हैं। इसके साथ ही ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज पालखी के राहुल गांधी दर्शन कर आर्शीवाद लेंगे और कुछ दूर पद यात्रा करेंगे। इस पदयात्रा में राहुल गांधी तीर्थयात्रियों के साथ चलेंगे।
राहुल को इस दिग्गज नेता ने किया है आमंत्रित
बता दें, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार जो रााजनीति के चाणक्य कहे जाते हैं, उन्होंने पंढरपुर वारी यात्रा के लिए राहुल गांधी को निमंत्रण दिया जिसके बाद राहुल गांधी ने इस यात्रा में सहभागिता करने का निर्णय लिया है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं इस यात्रा के क्या राजनीतिक अहमियत हैं?
क्यों अहम हुई ये धार्मिक यात्रा
लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल महाराष्ट्र का महा विकास अघाड़ी (MVA)ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था जिसके बाद राहुल गांधी ने इस यात्रा में शामिल होने का निर्णय लिया है। वहीं महाराष्ट्र में अब चंद महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो लाज़मी है कि राहुल गांधी पंढरपुर तीर्थयात्रा में शामिल होने का प्रमुख मकसद ये चुनाव है।
पंढरपुर तीर्थयात्रा में शामिल होकर राहुल गांधी चुनाव से पहले वोटरों के बीच अपनी पकड़ को पुख्ता करना चाहते हैं। तीर्थयात्रा में शामिल होकर राहुल गांधी महाराष्ट्र की जनता से जुड़ने की तैयारी में हैं।
पंढरपुर वारी यात्रा
पंढरपुर वारी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के दिलों में एक खास जगह रखती है। हर साल स्थानीय ही नहीं देश विदेश से लोगबारह लाख से अधिक श्रद्धालु आषाढ़ी वारी में हिस्सा लेते हैं। पंढरपुर तीर्थ परंपरा पिछले आठ सौ वर्षों से होती आ रही है। हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा को मानने वाले वारकारी संप्रदाय शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन में विश्वास रखता है।
वारकरी भक्त
वारकरी भक्त हर साल आषाढ़ महीने की एकादशी के दिन पुणे के आलंदी से पंढरपुर के श्री विट्ठल-रुक्मिनी मंदिर तक शोभायात्रा निकालते हैं। वारकरी भगवान विठोबा (भगवान कृष्ण के एक रूप) के भक्तों को कहा जाता है। भगवान पांडुरंगा को समर्पित पंढरपुर वारी यात्रा जो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले हो रही है उसमें राहुल गांधी शामिल होने जा रहे हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी दो बार पहुंचे थे महाराष्ट्र
याद रहे लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा दो बार महाराष्ट्र से गुजरी थी। इस दौरान राहुल गांधी लोगों से मिले और उनका दुख-दर्द बाटा था। उन्हें इस यात्रा के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों के साथ बातचीत करते और उनकी समस्याओं को समझते हुए देखा गया। जिसका परिणाम लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम के रूप में कांग्रेस को मिला। वहीं अब शरद पवार और राहुल गांधी महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव से पहले वार्षिक पंढरपुर तीर्थयात्रा में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
भाजपा की बढ़ी टेंशन
पंढरपुर वारी यात्रा में राहुल गांधी के शामिल होने से भाजपा की बौखलाहट बढ़ गई है। महाराष्ट्र बीजेपी के नेता तुषार भोसले ने यहां तक कह दिया है कि शरद पवार को राहुल गांधी को इस यात्रा में बुलाने का कोई अधिकार नहीं हैं। जो व्यक्ति हमेशा हिंदुओं से नफरत करता है उसे इस यात्रा में आमंत्रित नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा महाराष्ट्र चुनाव में लाभ लेने के लिए शरद पवार और राहुल इसमें रुचि दिखा रहे है क्योंकि ये तीर्थ शरद पवार के गृहजनपद से सदियों से गुजर रही है तो उन्होंने इससे पहले क्यों ऐसा कदम उठाया?
महाराष्ट्र में कांग्रेस से क्यों डरी है भाजपा?
बता दें कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और एनसीपी-एसपी वाले महा विकास अघाड़ी वाले गठबंधन ने भाजपा के महायुति गठबंधन की लोकसभा चुनाव में हवा निकाल दी थी। महराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से भाजपा के प्रतिनिधित्व वाले महायुति गठबंधन को जहां केवल 17 सीट ही मिली थी वहीं महाअघाड़ी गठबंधन को 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। जिसमें कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सर्वाधिक 13 सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा के सारे सपने चकनाचूर कर दिए थे।












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