मां के लिए बेटे की 'ममता', नदी तक न जाना पड़े, इसलिए 9वीं के छात्र प्रणव ने कुआं खोद डाला
Palghar boy: 9वीं में पढ़ने वाले एक लड़के ने अपनी मां की परेशानी देखकर अपने घर में ही कुआं खोद डाला है। वह नहीं चाहता कि उसकी मां को पानी लाने के लिए रोजाना नदी किनारे जाना पड़े।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक आदिवासी लड़के ने अपनी मां की परेशानी को दूर करने के लिए जिस तरह से संघर्ष करके कामयाबी हासिल की है, वह बहुत ही प्रेरणादायक है। 14 साल के प्रणव रमेश सालकर को यह बात हमेशा परेशान करती थी कि उसकी मां को रोज नदी से जाकर पानी लाना पड़ता है। उसने संकल्प लिया और अपनी झोपड़ी के पास ही एक कुआं खोद डाला।
9वीं के बच्चे ने मां के लिए कुआं खोद डाला
मुंबई से 128 किलोमीटर दूर पालघर जिले का केल्वे गांव आज लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय आदर्श विद्या मंदिर में नौवीं के छात्र प्रणव के किस्से हर जगह चर्चित हो रहे है। अपनी सफलता पर प्रणव ने अंग्रेजी अखबार टीओआई से कहा है, 'मुझे खुशी है कि अब मेरी आई को रोजाना नाले तक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।'
गर्मी में भी पूरे दिन खोदता रहा कुआं
गर्मी अपनी तपिश से किसी के भी हौसले को तोड़ने के लिए बढ़ती ही जा रही है। लेकिन, इमली और पीपल के पेड़ों की जड़ों से जूझते हुए प्रणव ने अपने संकल्प को अपने घर के आंगन में ही पूरा करना शुरू किया। उसके पास सिर्फ एक फावड़ा, बेलचा और एक छोटी सी सीढ़ी थी।
बेटे की 'ममता' पर गौरवांवित है मां
प्रणव के पिता रमेश के मुताबिक, 'प्रणव पूरे दिन धरती की खुदाई करता था, सिर्फ 15 मिनट खाने के लिए रुकता था।' खुद के प्रति बेटे की इस 'ममता' को देखकर उसकी मां दर्शना के चेहरे पर सिर्फ प्यार भरी मुस्कुराहट नजर आती है। कुएं के पास उसकी कामयाबी के बारे में एक छोटा सा बोर्ड भी लगाया गया है।
परिवार के लिए बना 'गर्व का कुआं'
जब प्रणव की मेहनत रंग लाई और उसके खोदे हुए कुएं से पानी निकलना शुरू हुआ तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 20 फीट की बावड़ी को बेहतर स्वरूप देने में उसके पिता ने भी उसकी मदद की है। अब उनके परिवार के लिए यह गर्व का कुआं बन चुका है।
मां की परेशानी से परेशान रहता था प्रणव
प्रणव का कहना है, 'मुझे अच्छा नहीं लगता था कि मेरी मां को पास के नाले से पानी लाने के लिए जाना पड़ता है। उसे रोज सुबह खाना बनाने और घर के दूसरे कामों से पहले बाल्टियों में पानी भरकर लाना पड़ता था।' रमेश सब्जी के खेतों में मजदूरी करते हैं। प्रणव उनके चार बच्चों में सबसे छोटा है।
प्रणव के 'भगीरथ प्रयास' की हो रही सराहना
प्रणव के 'भगीरथ प्रयास' का समाचार पूरे केल्वे में जबसे फैला है, वह वहां की सेलिब्रिटी बन चुका है। आसपास के गांव के लोग भी उसका कुआं देखने के लिए पहुंच रहे हैं। उसने बताया कि 'मेरे स्कूल टीचर भी कुआं देखने आए थे।'
पंचायत समिति ने नल भी लगा दिया
स्थानीय पंचायत समिति ने प्रणव के आंगन में तत्काल एक नल लगा दिया है। पंचायत समिति के प्रमुख संदीप किनी ने कहा, 'समिति उसे और भी मदद के लिए काफी उत्सुक है।' प्रणव की खासियत यह भी है कि वह प्रकृति प्रेमी है और पेड़ों पर चढ़ना और परिंदों को देखना उसके शौक हैं।
उसे फिलहाल यह डर सता रहा है कि उसकी लोकप्रियता उसके रोजाना दूर तक टहलने के रूटीन को न प्रभावित कर दे। वह काफी इनोवेटिव भी है और वह चीजों के साथ प्रयोग भी करता रहता है। हाल ही में अपनी झोपड़ी में रोशनी के लिए सोलर पैनल को बाइक की बैटरी से जोड़ चुका है।












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