मनसे में शिवसेना की काट देख रही हैं बीजेपी? मराठी छोड़, हिंदुत्व की राह पर राज ठाकरे
मुंबई, 30 अप्रैल। महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय बहुत कुछ पक रहा है। राज्य के राजनीतिक पटल पर हाल के दिनों में दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। इनमें से एक थी राज ठाकरे का उद्धव ठाकरे पर खुलकर हमला बोलना। ये घटना जितनी चौंकाने वाली थी उससे भी बड़ी घटना हुई जब कुछ ही दिन बाद राज ठाकने ने यूपी के सीएम और भाजपा के फायरब्रांड राजनीति का चेहरा बन चुके योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए ये कह दिया कि काश महाराष्ट्र में भी एक योगी होता।

बीजेपी को मिल सकता है नया साथी
इन घटनाओं पर बीजेपी की तरफ से भले ही अभी तक कुछ खुलकर कहा न गया हो लेकिन संकेत बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में बीजेपी बहुत ही सधी चाल चल रही है और अगर सब ठीक रहा तो उसे राज्य में एक नया साथी मिल सकता है जो शिवसेना की जगह ले सके। हालांकि राज ठाकरे इस जगह को कितना भर पाएंगे अभी इसमें संशय है और यही वजह है कि बीजेपी अभी कुछ भी कहने से बच रही है। शायद बीजेपी पहले देख लेना चाहती होगी कि राज ठाकरे क्या वास्तव में उद्धव का विकल्प बन सकते हैं। वहीं यह राज ठाकरे के लिए एक बार फिर से मौका है जिसमें वह अपनी पार्टी में जान फूंक सकते हैं।

यूपी सीएम की तारीफ के सियासी मायने
इन बयानों से पहले पिछले कुछ दिनों का राजनीतिक घटनाक्रम भी समझना होगा। बीते 3 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की राज ठाकरे से मुलाकात हुई थी।
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों राज ठाकरे हनुमान चालीसा को लेकर चर्चा में हैं। चर्चा भी यूं कि महाराष्ट्र की राजनीति ही इस समय इसके इर्द गिर्द घूम रही है। वैसे बाल ठाकरे की उंगली पकड़कर राजनीति सीखने वाले राज ठाकरे के लिए हिंदुत्व कोई नई चीज नहीं है लेकिन दो दिन पहले ही उन्होंने यूपी के सीएम को लेकर जो बयान दिया वह कुछ ज्यादा चौंकाने वाला है। राज ठाकरे ने यूपी में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर उतारे जाने के फैसले के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ तो ही साथ ही उद्धव ठाकरे को भोगी बता डाला।

मराठी राजनीति की जगह हिंदुत्व की राह
राज ठाकरे ने कहा कि दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में कोई 'योगी' नहीं है, हमारे पास जो है वह 'भोगी'। कभी उत्तर भारतीयों के खिलाफत को अपनी राजनीति का मुख्य हथियार बनाने वाले राज ठाकरे अगर यूपी के सीएम की इतनी तारीफ कर रहे हैं कि उसकी तरह ही महाराष्ट्र में भी सीएम चाह रहे हैं तो इस बात के अपने मायने हैं। ये भी सवाल हैं कि क्या राज ठाकरे मराठी राजनीति को छोड़कर हिंदू नेता बन रहे हैं ताकि शिव सेना के हिंदू वोटों को अपने पाले में खींच सके।

बीजेपी के लिए राज ठाकरे
हिंदुत्ववादी पार्टी की बात हो तो बीजेपी यह दावा तो खुद भी कर सकती है लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार का अपना महत्व है। शिवसेना के समर्थक आज भी खुद को बाल ठाकरे के साथ देखते हैं। यही वजह है कि एक तरफ बीजेपी उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व से दूर जाने का आरोप लगाते हुए हमला कर रही है तो वहीं एक दूसरा ठाकरे हिंदुत्व के इस राजनीतिक स्पेस पर अपना दावा ठोक रहा है।

राज ठाकरे के लिए बीजेपी
बीजेपी को महाराष्ट्र में एक साथी की जितनी जरूरत है उससे कहीं ज्यादा जरूरत राज ठाकरे को है। राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में कट्टर मराठी कार्ड खेल चुके हैं और इसमें उन्हें खास सफलता नहीं मिली है। राज ठाकरे की पार्टी को रिवाइव होने की सख्त जरूरत है और इसके लिए बीजेपी से बेहतर साथी मिलना मुश्किल है। वहीं बीजेपी के साथ जाने के लिए आक्रामक मराठी कार्ड मुश्किल बनेगा ये बात भी मनसे नेता जानते हैं।
राज ठाकरे के लिए बाल ठाकरे का उदाहरण भी है जिन्होंने मराठा अस्मिता की राजनीति शुरू की और बाद में हिंदुत्व का झंडा उठा लिया। इसी के बाद बाल ठाकरे बीजेपी के साथ आए और दोनों ने महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक हस्तक्षेप किया। अब राज ठाकरे की नजर भी वहीं होगी और वह भी एक बार फिर से वैसा ही माहौल तैयार कर रहे हैं।












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