अजित पवार से गठबंधन BJP को महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव में पड़ा भारी? RSS से जुड़ी पत्रिका ने बताई ये वजह
Maharashtra BJP-NCP Alliance: लोकसभा चुनाव में इस बार भाजपा अपने दम पर बहुमत लाने से चूक गई। बीजेपी यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र में पहले जैसा कमाल नहीं दिखा पाई। महाराष्ट्र में बीजेपी ने अजित पवार की एनसीपी और शिंदे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिसमें नतीजे पार्टी की सोच के विपरीत आए।
2019 में 23 की तुलना में इस बार घटकर 9 पहुंची बीजेपी के हार के कारणों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक मराठी साप्ताहिक ने लिखा कि अजित पवार की एनसीपी इसकी बड़ी वजह रही है।

'विवेक' ने बताई बीजेपी की हार की वजह
आरएसएस से जुड़े प्रकाशन 'विवेक' ने भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों का विश्लेषण करने के लिए मुंबई, कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के 200 व्यक्तियों का अनौपचारिक सर्वे किया। कुल 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा की सीटों की संख्या 2019 के चुनावों में 23 से घटकर 9 हो गई।
अजित के साथ को जनता ने नाकार
सर्वे के अनुसार, भाजपा सदस्यों और व्यक्तियों ने पवार के साथ गठबंधन करने के पार्टी के फैसले को अस्वीकार किया है, जिन्होंने पिछले साल जुलाई में अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी को तोड़कर 'महायुति' गठबंधन में शामिल हो गए थे।
वोटर्स की भावनाएं ऐसे हुई खिलाफ
मराठी साप्ताहिक ने कहा है कि अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ गठबंधन के बाद महाराष्ट्र में मतदाताओं की भावनाएं भाजपा के खिलाफ हो गईं, जिसका यह नतीजा रहा कि भगवा पार्टी का खराब प्रदर्शन रहा।
इधर, खुद चुनावों में फरवरी में चुनाव आयोग से असली एनसीपी के रूप में मान्यता हासिल करने वाली अजित पवार की पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाईं, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने लोकसभा में सात सीटें हासिल की है।
रिपोर्ट में कहा किया गया है कि महाराष्ट्र भाजपा के भीतर कथित असंतोष की ओर इशारा किया गया, जिसमें दावा किया गया कि एनसीपी के साथ गठबंधन पर इसके सदस्यों के बीच असहमति है।












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