Maharashtra Elections: 'अपना टाइम आएगा'! कैसे राजनीतिक दलों की मदद कर रहे संगीत की दुनिया के लोग

Maharashtra Elections 2024: चुनाव लड़ने का तरीका अब सिर्फ परंपरागत नहीं रह गया है। इसमें टेक्नोलॉजी भी घुस चुकी है। लेकिन, भारत और दुनिया के अन्य जगहों पर संगीत आज भी चुनाव प्रचार का एक प्रमुख साधन बना हुआ है। हालांकि, इसका स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है। महाराष्ट्र चुनाव में इस बार विशेष रूप से युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए रैप म्यूजिक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

युवा वोटरों की चुनावों में दिलचस्पी बनी रहे इसके लिए रैप गानों का जमकर सहारा लिया जा रहा है। इसके माध्यम से राजनीतिक पार्टियां और उम्मीदवार भी उनके समझने लायक चुनावी बातें रैप गीजों के माध्यम से युवा वोटरों तक पहुंचाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

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महाराष्ट्र चुनाव में रैप गानों की भरमार
इस बार के चुनावों में देखा जा रहा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी दोनों ही अपने कामों के प्रचार के लिए रैप गाने का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। कई सारे प्रत्याशियों ने भी अपने लिए रैप गाने तैयार करवा लिए हैं। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक गीतकारों का कहना है कि रैप गीत एक पावरफुल एम्पलीफायर का काम कर रहे हैं, जिससे पार्टियों को न केवल बातें कहने में मदद मिलती है, बल्कि विरोधियों की आलोचना करने में भी सहायता मिल रही है।

'महाराष्ट्र के वोटर जाग चुके हैं'
चुनाव प्रचार वाली गाड़ियों से लेकर चुनावी रैलियों तक में इस तरह के गाने बचाए जा रहे हैं, ताकि मतदाताओं का मनोरंजन भी होता रहे और वह संबंधित दल या प्रत्याशियों के चुनावी एजेंडे से भी अवगत होते रहें। इसी तरह का एक मराठी रैप गाना सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है।

इसमें विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) को निशाना बनाया गया है। इस मराठी गाने का भाव है- 'महाराष्ट्र के वोटर जाग चुके हैं।' यह अनाम रैप गीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल है और खासकर युवाओं के बीच बहुत ही लोकप्रिय हो चुका है।

'रैप की लोकप्रियता के लिए प्रामाणिकता जरूरी'
पॉलिटकल कंसल्टेंट आनंद शिंदे का कहना है, 'रैप झंकार बहुत ही पावरफुल एम्पलिफायर का काम करता है, इससे पार्टियों को अपनी बातों को कहने के लिए एक प्लेटफॉर्म तो मिलता ही है, विरोधियों की आलोचना का रास्ता भी मिल जाता है....जिससे जनता के साथ एक व्यापक जुड़ाव हो जाता है। वैसे यह प्रामाणिकता पर आधारित है; सफल राजनीति के लिए रैप को मतदाताओं की वास्तविक चिंताओं और आकांक्षाओं के हिसाब से प्रतिध्वनित होना चाहिए।'

शिंदे की टीएम शरद पवार की एनसीपी-एसपी के उम्मीदवार बापू पठारे के प्रचार के लिए खास प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी रैप गाने को प्रभावी तौर पर इस्तेमाल करने का उदाहरण पेश कर चुकी है। वह 'लगे रहो केजरीवाल' गाने का जबर्दस्त फायदा उठा चुकी है। पार्टी को युवा वोटरों से जोड़ने में यह बहुत ही प्रभावी रहा था।

गीतकारों को भी मिला बहुत बड़ा काम
पुणे की एक गीतकार साक्षी राठौर ने इसी से प्रेरणा लेकर रैप गाने की सीरीज तैयार की है, जिसमें मौजूदा महायुति सरकार से गानों के माध्यम से तीखे सवाल भी पूछे गए हैं। राठौर का कहना है, 'चुनावों की घोषणा होने से पहले मैंने इसके लिए लिखना शुरू कर दिया था और यह जनता के नजरिए से सरकार की कामयाबियों और नाकामियों का मिश्रण है।'

2019 के चुनावों में बीजेपी ने किया था भरपूर इस्तेमाल
2019 के चुनावों में भाजपा ने युवा वोटरों खासकर टेक-सेवी मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए ऐसे कई रैप गाने तैयार करवाए थे, जो विशेष रूप से शहरी वोटरों की हृहय की गहराइयों में उतारने के लिए बनाए गए थे। इसने तब डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसी सरकारी कार्यक्रमों पर फोकस किया था।

'अपना टाइम आएगा'
सतारा में एक निर्दलीय प्रत्याशी कृष्णकुमार पाटिल ने घर-घर जाकर प्रचार अभियान चलाने के लिए भी रैप गाना तैयार करवाया है। उनका गाना बॉलीवुड की फिल्म 'गली बॉय' के हिट गाने 'अपना टाइम आएगा' पर आधारित है। पाटिल कहते हैं कि 'मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में युवाओं का ध्यान खींचा है। हम अपनी पदयात्राओं और रैलियों के दौरान भी ये गीत बजा रहे हैं।'

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