Sharad Pawar and Gautam Adani's Friendship: सालों पुराना है पवार-अडानी का याराना, जानिए कुछ अनसुने किस्से
Sharad Pawar-Gautam Adani: एनसीपी ने कहा कि शरद पवार और गौतम अडानी की मुलाकात व्यक्तिगत थी,वैसे अडानी पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।

Sharad Pawar-Gautam Adani's Friendship: गुरुवार को महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में उस वक्त हड़कपं मच गया जिस वक्त उद्योगपति गौतम अडानी एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने उनके आवास 'सिल्वर ओक' पहुंचे थे। अडानी ने पवार संग करीब दो घंटे का वक्त व्यतीत किया और उनके जाने के ठीक बाद शिवसेना सांसद संजय राउत का पवार के घर पहुंचने से सियासी सुगबुगाहट शुरू हो गई।
राउत- पवार की मुलाकात सामान्य
हालांकि एनसीपी की ओर से कहा गया कि राउत- पवार की मुलाकात का और पवार-अडानी की मुलाकात से कुछ भी लेना-देना नहीं है लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि ये मुलाकात कांग्रेस को अच्छी नहीं लगी होगी।
पवार और अडानी की मुलाकात व्यक्तिगत
मालूम हो कि शरद पवार और गौतम अडानी बहुत पुराने दोस्त हैं। दोनों करीब बीस सालों से मित्र हैं और इस बात का जिक्र शरद पवार ने अपनी आत्मकथा में बखूबी किया भी है। मालूम हो कि शरद पवार ने साल 2015 में मराठी भाषा में अपनी आत्मकथा 'लोक माझे सांगाती' लिखी थी, जिसमें उन्होंने अडानी की जमकर तारीफ की है।
सच्चा दोस्त और आशावादी सोच का मालिक
अपनी लेखनी में पवार ने गौतम अडानी को सच्चा दोस्त, मेहनती इंसान और आशावादी सोच का मालिक बताया है, यहां तक कि उन्होंने ये भी लिखा है अडानी ने थर्मल क्षेत्र में कदम उनकी सलाह लेने के बाद ही रखा था।
अलग सोच के मालिक गौतम अडानी
उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि गौतम अडानी शुरू से ही अलग सोच रखते थे, वो हीरों का अच्छा बिजनेस कर रहे थे लेकिन वो उससे संतुष्ट नहीं थे, वो infrastructure sector में नाम कमाना चाहते थे और इसलिए उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल से बंदगाह को विकसित करने की बात कही थी।
अडानी का जुझारूपन पसंद
हालांकि ये बंदरगाह पाकिस्तान की सीमा रेखा के पास था, जिसके लिए मैंने उन्हें चेताया भी था लेकिन अडानी ने मुझसे कहा कि 'यही तो चैलेंज है और चैलेंजिग काम करने में उन्हें आनंद आता है।' पवार ने लिखा है कि अडानी का जुझारूपन उन्हें काफी पसंद है, अपनी मेहनत के ही दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
अडानी सुझावों का भी सम्मान करते हैं
पवार ने अपनी किताब में ये भी लिखा है कि गौतम अडानी लोगों की बातों और सुझावों का भी सम्मान करते हैं। एक इवेंट में मैंने मंच से उन्हें कोयला क्षेत्र में उतरने की सलाह दी थी, जिसे उन्हें सुना भी और माना भी इसके बाद ही उन्होंने भंडारा में ताप ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया था।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट की वजह से विपक्ष के निशाने पर अडानी
पवार और अडानी अपने-अपने क्षेत्र के काफी नामी गिरामी हस्तियां हैं लेकिन अडानी जब भी मुंबई आते हैं वो जरूर उनसे मिलने आते हैं। दोनों की दोस्ती से एनसीपी के कार्यकर्ता और समर्थक वाकिफ हैं लेकिन इस बार दोनों की मुलाकात पर हलचल मचने के पीछे हिंडनबर्ग रिपोर्ट है, जिसकी वजह से अडानी कांग्रेस के निशाने पर हैं।
पवार ने खड़े किए हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर सवाल
इस महीने की शुरुआत में पवार ने गौतम अडानी का समर्थन करते हुए हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अपने विपक्षी नेताओं को उस वक्त हैरानी में डाल दिया था, जब उन्होंने कहा कि अडानी के कामकाज की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति से करानी चाहिए और उन्हें लगता है कि कुछ लोग जानबूझकर उद्योग समूह को निशाना बना रहे हैं। उनकी इस प्रतिक्रिया से कांग्रेस को जबरदस्त मिर्ची लगी थी, जो कि अडानी को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर वार कर रही है।












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