Maharashtra: अगर ऐसा हुआ तो अजित पवार की स्थिति "न घर की, न घाट की" वाली हो जाएगी!
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग जल्द ही कर सकता है। महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की टीम जैसे ही चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए पहुंची वैसे राजननीति सरगर्मियां तेज हो गई हैं और पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
इस सबके बीच इसी सप्ताह दो ऐसी दो बातें हुई है जिसने राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की धड़कनें बढ़ा दी है। चुनावों की तैयारी कर रही अजित पवार की पार्टी चुनाव से पहले गहरी चिंता में पड़ चुकी है। आइए जानते हैं पूरा मामला?

दरअसल, अजित पवार की पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह "घड़ी" छिनने का एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही महायुति गठबंधन में उनके भविष्य को लेकर खतरा मंडराने लगा है। याद रहे अजित पवार अपने सगे चाचा शरद पवार से बगावत करके 2023 में विरोधी सत्तारूढ़ महायुति से हाथ मिलाकर सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री बने थे और अपने चाचा पवार की पार्टी एनसीपी का नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह तक हथिया लिया था।
सुप्रिया सुले के प्रण ने बढ़ाई अजित पवार की धड़कने
क्योंकि शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले ने एक दिन पहले चुनावी रैली में प्रण लिया है कि वो तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक अपने पिता शरद पवार की पार्टी का एनसपी ना और चुनाव चिन्ह घड़ी नहीं दिलवाद देती।
चुनाव से पहले अजित पवार की बढ़ सकती है मुसीबत
महाराष्ट्र चुनाव से ठीक पहले सुप्रिया सुले ने ये प्रण लिया है। याद रहे एनसीपी के संस्थापक शरद पवार अपनी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं अगर महाराष्ट्र चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट शरद पवार के पक्ष में फैसला सुनाता है तो अजित पवार से पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह दोनों छिन सकता है।
देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के साथ को बताया भाजपा की गलती
वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो दिन पहले लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा को मिली हार की वजह अजित पवार के साथ गठबंधन करना बताया है। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार की प्रमुख वज अजित पवार की एनसीपी का वोट ट्रांसफर नहीं होना था। फडणवीस ने कहा भाजपा के कोर वोटरों को अजित वार से गठबंधन रास नहीं आया।
महायुति छोड़ सकता है साथ?
देंवेंद्र फडणवीस के इस बयान से माना जा रहा है कि महायुति गठबंधन से अजित पवार और उनकी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। ऐसी दोनों परिस्थितियां अगर होती है तो अजित पवार की स्थिति "न घर की, न घाट" की हो जाएगी।
भाजपा को खल रहा अजित पवार का ये रवैया
बता दें विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अजित पवार और उनकी पार्टी उन्हें राज्य का अगला मुख्यमंत्री चेहरा बता रही है और महायुति सरकार द्वारा शुरू की गई माझी लड़की बहन योजना का क्रेडिट खुद ले रहे हैं और वोटरों को बता रहे हैं, ये योजना उनकी पार्टी ने शुरू की है। इतना ही नहीं सीटों बंटवारें को लेकर भी अजित पवार महायुति के लिए समस्य बने हुए हैं।












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