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एकनाथ शिंदे Shivsena ने शरद पवार NCP के साथ बनाया नया गठबंधन, समझें क्‍या बदलेंगे समीकरण, किसका पावर होगा कम?

Shiv Sena NCP Alliance: महाराष्‍ट्र की राजनीति में बीते 6 वर्षों में हुए बदलावों ने सबको हैरान किया है। वहीं मुंबई मेयर चुनाव से ठीक एक दिन पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में फिर बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों विरोधी गुटों ने साथ मिलकर एक नया संयुक्त गठबंधन बना लिया है।

इस गठबंधन को कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय में 'शिवसेना समूह' के रूप में रजिस्‍टर किया गया है। जानते हैं आखिर इस नए गठबंधन से क्‍या फर्क पड़ेगा और कौन सी पार्टी पर पावर कम होगा?

Eknath Shinde Shiv Sena forms alliance with Sharad Pawar s NCP

समितियों में बदलेगा प्रतिनिधित्व

इस कदम से नगर निगम की वैधानिक समितियों में सीटों के समीकरण बदलने तय माने जा रहे हैं। नए गठबंधन के रजिस्‍ट्रेशन के बाद शिवसेना और एनसीपी के दोनों गुटों को समितियों में एक ही इकाई के रूप में गिना जाएगा।

शिवसेना-एनसीपी गठबंधन से किसका पावर होगा कम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति कमजोर हो सकती है और वैधानिक समितियों में उसकी हिस्सेदारी घट सकती है। वहीं, एनसीपी गुटों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।

क्‍या महायुति का पावर कम होगा?

एनबीटी की रिपेार्ट के अनुसार दादर से पार्षद अमेया घोले को इस नए 'शिवसेना समूह' का नेता नियुक्त किया गया है। घोले ने स्पष्ट किया है कि शिवसेना महायुति का हिस्सा बनी रहेगी और भाजपा के साथ मिलकर काम करती रहेगी। हालांकि पहले स्थायी और सुधार समितियों में सत्ताधारी महायुति और विपक्ष के बीच लगभग संतुलन की स्थिति थी। लेकिन नए गठबंधन के बाद शक्ति संतुलन में बदलाव संभावित है। इससे न केवल समिति गठन बल्कि भविष्य की नीतिगत और वित्तीय फैसलों पर भी असर पड़ सकता है।

संयुक्त ताकत 33 पार्षदों की

नगर निगम चुनाव में शिवसेना ने 29 सीटें जीती थीं। एनसीपी को तीन और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) को एक सीट मिली थी। अब संयुक्त पंजीकरण के बाद इनकी कुल संख्या 33 पार्षदों की हो गई है। इसके मुकाबले, शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 24 सीटें हैं। ऐसे में समितियों के गठन में शक्ति संतुलन पर सीधा असर पड़ेगा।

स्थायी समिति की नई संभावित संरचना

बीएमसी की 26 सदस्यीय स्थायी और सुधार समितियों में पहले संरचना इस प्रकार थी:

भाजपा - 10

शिवसेना - 3

शिवसेना (यूबीटी) - 8

कांग्रेस - 3

एआईएमआईएम - 1

नए गठबंधन के बाद संभावित संरचना इस तरह हो सकती है?

भाजपा - 10

शिवसेना-एनसीपी समूह - 4

शिवसेना (यूबीटी) - 7

कांग्रेस - 3

एआईएमआईएम - 1

स्थायी समिति को बीएमसी का सबसे शक्तिशाली निकाय माना जाता है, जो वित्तीय स्वीकृतियों और बड़ी नागरिक परियोजनाओं को मंजूरी देती है। वहीं, सुधार समिति बुनियादी ढांचे और निगम संपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी है।

मनोनीत पार्षदों के आवंटन पर असर

मुंबई नगर निगम अधिनियम के तहत पार्टी की ताकत के आधार पर आठ पार्षद मनोनीत किए जाते हैं। पहले आवंटन का अनुमान इस प्रकार था:

भाजपा - 4

शिवसेना (यूबीटी) - 3

कांग्रेस, एमएनएस और एआईएमआईएम - 1-1

नए समीकरणों के बाद संभावित आवंटन इस प्रकार हो सकता है:

भाजपा - 4

शिवसेना-एनसीपी गठबंधन - 2

शिवसेना (यूबीटी) - 3

कांग्रेस - 1

इस बदलाव से एआईएमआईएम और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि उनके हिस्से में कोई मनोनीत पार्षद नहीं बचेगा।

क्या बोले अमेया घोले?

अमेया घोले ने कहा, "एनसीपी के दोनों गुटों के पार्षदों ने सदन में शिवसेना को समर्थन दिया है। इसी के चलते हमने खुद को एक एकल दल के रूप में पंजीकृत कराया है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना महायुति का हिस्सा बनी रहेगी और समितियों में संयुक्त निर्णयों का समर्थन करेगी।

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