एकनाथ शिंदे सरकार ने MVA का फैसला पलटा, महाराष्ट्र में CBI जांच की सामान्य सहमति बहाल
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार ने उद्धव ठाकरे की पिछली महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के सीबीआई को राज्य में जांच के लिए सामान्य सहमति (General consent) वापस लिए जाने के फैसले को पलट दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच के लिए पहले वाली व्यवस्था फिर से बहाल हो गई है। राज्य सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक शिंदे सरकार ने केंद्रीय एजेंसी को सामान्य सहमति बहाल कर दी है। पिछली सरकार ने कथित 'टीआरपी घोटाला' की सीबीआई जांच की आशंका को लेकर यह कदम उठाया था।

महाराष्ट्र में सीबीआई को जांच के लिए सामान्य सहमति बहाल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाले गृह विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें सीबीआई को महाराष्ट्र में जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति को वापस लेने के एमवीए सरकार के फैसले को बदल दिया गया था। न्यूज एजेंसी पीटीआई को मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के फैसले को पलटने के बाद सीबीआई को महाराष्ट्र में जांच के लिए कदम रखने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता अब खत्म हो चुकी है।
उद्धव ठाकरे की एमवीए सरकार ने वापस ली थी सामान्य सहमति
दरअसल, 21 अक्टूबर, 2020 को उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तत्कालीन एमवीए सरकार ने सीबीआई को राज्य में जांच के लिए हमेशा से प्राप्त सामान्य सहमति छीन ली थी। इसकी वजह केंद्र सरकार के साथ उसका तकरार था, जिसमें एमवीए के घटक दलों- उद्धव की शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस का आरोप था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार राजनीतिक दुर्भावना से केंद्रीय जांच एजेंसी का जांच के नाम पर दुरुपयोग कर रही है।
'टीआरपी घोटाला' की जांच अपने हाथ में लेने की आशंका से लिया था फैसला
दरअसल, उस समय उद्धव सरकार के मन में यह डर बैठा था कि कहीं सीबीआई मुंबई पुलिस में दर्ज कथित 'टीआरपी घोटाला' की जांच अपने हाथों में ना ले ले। क्योंकि, जांच एजेंसी ने यूपी में ऐसा ही किया था। तब महाराष्ट्र में एनसीपी के नेता अनिल देशमुख गृहमंत्री थे, जो पिछले कई महीनों से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जेल में बंद हैं। उन्होंने तब पूरजोर आशंका जताई थी कि सीबीआई महाराष्ट्र में कथित राजनीतिक दबाव में कार्रवाई कर सकती है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की तरह ही पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे बीजेपी-विरोधी पार्टियों की ओर से शासित राज्यों में भी इसी तरह से सीबीआई जांच की सामान्य सहमति वापस ली जा चुकी है।












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