रेप पीड़िता का गर्भ गिराने की मां की मांग, कोर्ट ने किया इनकार, कहा- बच्चा पैदा होना ही है तो...
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने 15 साल की रेप पीड़िता की मां की दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुनाया है। डॉक्टर ने भी राय दी कि गर्भपात में बच्चे और पीड़िता की जान को खतरा भी हो सकता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि अगर किसी भी मामले में बच्चा पैदा होना ही है, तो हमारा मानना है कि बच्चे के स्वास्थ्य और उसके शारीरिक-मानसिक विकास पर विचार करने की जरूरत है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नेचुरल चाइल्ड बर्थ सिर्फ 3 महीने दूर है तो ऐसे में उसके विकास पर विचार करने की जरूरत है। यह सुनवाई मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस आरवी घुगे और जस्टिस वाईजी खोबरागड़े की खंडपीठ ने की।

दरअसल, कोर्ट 26 जून को 15 साल की रेप पीड़िता की मां की दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने गर्भ को गिराने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। याचिका में मांग की गई थी कि नाबालिग पीड़िता के गर्भ को गिरा दिया जाए।
याचिका में बताया गया कि पीड़िता फरवरी में लापता हो गई थी और तीन महीने बाद राजस्थान में मिली थी। लेकिन, उसके साथ रेप की घटना भी घट चुकी थी। जिससे वो प्रेग्नेंट थी। हालांकि, आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत सजा दी गई थी।
डॉक्टर बोले- गर्भपात में भी बच्चा होगा जीवित
डॉक्टरों ने राय दी कि अगर नाबालिग का गर्भपात कराया गया, तब भी बच्चा जीवित पैदा होगा। इससे मां और उसके बच्चे दोनों के लिए गर्भपात खतरनाक है। ऐसे में कोर्ट ने गर्भपात से साफ इनकार कर दिया।












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