BMC Election Survey में भाजपा-शिवसेना को लेकर आए चौंकाने वाले नतीजे, जानिए ठाकरे ब्रदर्स को क्‍या होगा?

BMC Election Survey: बृहद मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 लंबे इंतजार के बाद होने जा रहा है। बीते कई वर्षों से बीएमसी में कब्जा जमाए हुए ठाकरे शिवसेना के विभाजन के बाद ये पहला बीएमसी चुनाव है। जिसमें सत्‍तारूढ़ महायुति में शामिल भाजपा-शिवसेना का मुकाबला ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठारके की MNS से होगा।

दिसंबर 2025 में करवाए गए एस्केंडिया स्ट्रैटेजीज एलएल के सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। इस सर्वे से साफ हो चुका है कि मुंबई के लोग अब पार्षद के चेहरे, पार्टी या जाति-धर्म नहीं उनके कामकाज को प्राथमिकता देंगे। इस सर्वेक्षण के अनुसार, 40% से 54% लोगों ने अपनी राय में पार्षद के कार्य को ही सबसे बड़ा निर्णायक कारक बताया है।

BMC Election Survey

एस्केंडिया स्ट्रैटेजीज एलएलपी द्वारा ये सर्वे 17 से 24 दिसंबर 2025 के बीच कराया गया था, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक समूहों के 1000 से अधिक लोगों की राय ली गई थी। इस सर्वे की एक बड़ी बात यह है कि 60 प्रतिशत मतदाता अभी भी उलझन में हैं कि वे किसे वोट दें।

बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिवसेना या ठाकरे ब्रदर्स किसकी हो रही जीत?

दैनिक भाष्‍कर की रिपोर्ट के अनुसार सर्वे के मुताबिक, विधानसभा चुनावों के रुझानों के अनुरूप, बीएमसी चुनावों में भी महिला मतदाताओं का लगभग 50% समर्थन भाजपा-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन के पक्ष में जा सकता है। वहीं, मराठी मानुस का वोट शिवसेना (यूबीटी)-एमएनएस को 44% और भाजपा-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को 42% मिलता दिख रहा है, जिससे स्पष्ट है कि मराठी वोट किसी एक तरफ बंटा हुआ नहीं है।

मुस्लिम, यूपी-बिहार और गुजराती वोटर किसे दे रहे वोट?

मुस्लिम मतदाताओं में 41% इंडियन नेशनल कांग्रेस प्लस गठबंधन के साथ खड़े दिख रहे हैं। वहीं, गुजराती, उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय समुदायों में भाजपा-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को 53% तक समर्थन मिलने का अनुमान है। इससे साफ है कि वोटिंग पैटर्न काफी हद तक सामुदायिक पहचान से प्रभावित हो रहा है।

सर्वे में सामने आई ये चौंकाने वाली बातें

  • सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लगभग 50% लोगों ने कभी भी किसी शिकायत या काम के लिए अपने पार्षद से संपर्क ही नहीं किया।
  • बीएमसी चुनाव में मतदाताओं के लिए पार्षद का कामकाज सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। खास तौर पर 36 से 45 वर्ष के आयु वर्ग में 54% लोगों ने पार्षद के काम को प्राथमिकता दी। जनहित के मुद्दे (जैसे पानी, सड़क, सफाई) और विकास कार्य अहम माने जा रहे हैं।
  • अधिकांश मतदाताओं के लिए पार्टी का चुनाव चिन्ह या मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री का चेहरा कम मायने रखता है।
  • 46 से 60 वर्ष के लोग अपने पार्षद के कामकाज से सबसे अधिक संतुष्ट नजर आए। इसके उलट, युवा वर्ग में नाराजगी ज्यादा देखने को मिली। खासकर 18 से 25 साल के युवाओं में 13% ने अपने कॉरपोरेटर से "बहुत असंतुष्ट" होने की बात कही।

मतदाता भागीदारी और अनिश्चितता

2024 के विधानसभा चुनाव में मराठी मानुस (63%) और मुस्लिम (57%) मतदाताओं की भागीदारी अधिक रही। लेकिन 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। महिलाओं में 69%, मराठी मानुस में 55%, मुस्लिम में 52% और अन्य वर्गों में 63% लोग अब तक यह फैसला नहीं ले पाए हैं कि वे किसे वोट देंगे या वोट डालेंगे भी या नहीं। इसका असर 2017 बीएमसी चुनाव में भी दिखा था, जब 45% लोगों ने वोट नहीं डाले थे।

बीएमसी के कामकाज से क्‍या संतुष्‍ट हैं लोग?

  • कुल मिलाकर बीएमसी के कामकाज को लेकर अधिकतर लोगों की राय सकारात्मक रही है।
  • 36 से 45 वर्ष के 56% लोगों ने माना कि हालात पहले से बेहतर हुए हैं।
  • 18 से 25 साल के युवाओं में यह आंकड़ा और ज्यादा रहा - 67%।
  • हालांकि, 60 साल से अधिक उम्र के लोग ज्यादा नाराज दिखे:
  • इस वर्ग में 23% लोगों ने बीएमसी की सेवाओं को "बहुत खराब" बताया।

बीएमसी चुनाव में किन पार्टियों के बीच हो रहा मुकाबला?

बीएमसी चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।

  • मुंबई नगर निकाय की कुल 227 सीटों में से 32 सीटों पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन और शिवसेना (यूबीटी)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है।
  • इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) और बहुजन वंचित अघाड़ी (वीबीए) गठबंधन ने इन 32 सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है।
  • कांग्रेस ने अब तक मुंबई में 143 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जबकि वीबीए 46 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस तरह कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कुल 195 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसी कारण 32 सीटें बिना तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार के रह जाती हैं, जिससे वोटों का बंटवारा नहीं होगा और सीधा मुकाबला होगा
  • वामपंथी दलों और राष्ट्रीय समाज पार्टी सहित अन्य सहयोगियों को छह सीटें दी गई हैं।
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