महाराष्ट्र के इस शहर में मांस-मछली बेचने पर लगी रोक, नगर निकाय ने इस वजह से लिया फैसला
पुणे, 1 अप्रैल: महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित देहू शहर में मांस और मछली बेचने पर पाबंदी लगा दी गई है। यह फैसला देहू नगर निकाय ने लिया है। ये पाबंदी कच्चे और पके दोनों तरह की मांस-मछलियों पर लगाई गई है, जो कि शुक्रवार से ही प्रभावी हो गया है। देहू को प्रख्यात मराठी संत और कवि तुकाराम के लिए जाना जाता है, जिनका यहीं जन्म हुआ था और उनका एक भव्य मंदिर यहां पर है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मथुरा-वृंदावन में इस तरह की रोक लगाई थी और यह पुणे जिले में हुआ है और राज्य में एमवीए की सरकार है, जिसमें शिवसेना के साथ-साथ कांग्रेस और एनसीपी शामिल हैं।

देहू शहर में मांस-मछली बेचने पर बैन
देहू शहर में मांस और मछली बेचने पर पाबंदी लगाने की जानकारी देते हुए देहू नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर प्रशांत जाधव ने कहा, '25 फरवरी को नगर पंचायत की पहली आम सभा में वारकरियों (भगवान विट्ठल के श्रद्धालुओं) और स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए देहू शहर क्षेत्र में मछली और मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था।' उन्होंने कहा है कि टेंपल टाउन होने की वजह से पहले से भी यहां कुछ ही ऐसी दुकानें थीं, जहां मांसाहारी चीजें बेची जाती थी, लेकिन अब से वो भी बंद कर दिए गए हैं।

करीब 40,000 है देहू की आबादी
पाबंदी की तामील के लिए एक उड़न दस्ते का गठन किया गया है, जो शहर की निगरानी करेगा कि इसका उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। जाधव के मुताबिक, 'जब यह इलाका ग्राम पंचायत के दायरे में था, तब यह एक आपसी सहमति थी कि मांसाहारी चीजें नहीं बेचनी है। लेकिन, कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ दुकानें खुल गईं। जब हाल ही में नगर पंचायत का गठन हुआ है तो मांस और मछली बेचने पर औपचारिक पाबंदी का प्रस्ताव पास किया गया है।' देहू शहर की आबादी करीब 40,000 से ज्यादा है।

भक्ति परंपरा के कवि थे संत तुकाराम
तुकाराम मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी संजय मोरे का कहना है कि शहर में मछली और मांस बेचने पर पाबंदी की मांग सभी स्टेकहोल्डर्स की ओर से की जा रही थी। गौरतलब है कि संत तुकाराम महाराष्ट्र में भक्ति परंपरा के एक बहुत ही प्रतिष्ठत कवि रहे हैं। उनका जन्म देहू शहर में ही 17वीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ था। यहां उनके मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना बड़ी तादाद में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

संत तुकाराम की पालकी यात्रा में जुटती है भारी भीड़
देहू के गाथा मंदिर संत तुकाराम की विरासत आज भी महसूस की जाती है। यहां दीवारों पर उनकी काव्य रचना उकेरी गई है। संत तुकाराम की याद में होने वाले वार्षक महोत्सव में लाखों श्रद्धालु जुटते रहे हैं। उनके भक्तों को वरकारी कहते हैं। उनके पालकी यात्रा के लिए देहू में भारी संख्या में दूर-दूर से लोग जुटते हैं। यहां मंदिर में संत तुकाराम की चरणों के निशान रखे हुए हैं, जो कि उनके भक्तों के लिए आस्था की वस्तु है। (पहली तस्वीर- प्रतीकात्मक और बाकी फाइल)












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