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बिहार: बाबा सिद्दीकी के पैतृक गांव में छाया मातम, स्थानीय बोले-'फेल है महाराष्ट्र सरकार'

Baba Siddiqui Murder: महाराष्ट्र के जाने-माने विधायक बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिससे राजनीतिक और फिल्मी समुदाय दोनों में शोक की लहर दौड़ गई। सिद्दीकी कांग्रेस पार्टी के पूर्व नेता और मंत्री रह चुके थे। हाल ही में एनसीपी (अजीत पवार) गुट से जुड़े थे। उनकी लोकप्रियता और समाज के प्रति योगदान के कारण उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त था। उनके असामयिक निधन की खबर ने बिहार के गोपालगंज जिले में उनके पैतृक गांव मांझा शेखटोली को भी शोकमग्न कर दिया। जहां उनके परिवार और स्थानीय लोग उनके निधन से गहरे सदमे में हैं।

मुंबई में हुआ जन्म

सिद्दीकी का जन्म भले ही मुंबई में हुआ हो। लेकिन उन्होंने अपने पैतृक गांव से हमेशा गहरा नाता बनाए रखा। लगभग पचास साल पहले उनके दादा अब्दुल रहीम रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे और वहां घड़ीसाज के रूप में काम शुरू किया। इसके बावजूद सिद्दीकी का गांव से जुड़ाव कभी नहीं टूटा और वे अक्सर अपने गांव लौटकर वहां के विकास में योगदान देते रहते थे।

baba siddique

पिता की याद में बनाया ट्रस्ट

अपने समुदाय के उत्थान के लिए सिद्दीकी के प्रयासों को उनके पिता मोहम्मद रहमान की याद में स्थापित रहमान मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से महसूस किया गया। इस ट्रस्ट के अंतर्गत उन्होंने बिहार के विभिन्न जिलों में 40 से अधिक शिक्षा केंद्र खोले। जहां बच्चों को मुफ्त शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराए जाते थे। इन केंद्रों का उद्देश्य युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ कंप्यूटर कौशल सिखाना भी था। ताकि सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। उनके भतीजे मोहम्मद गुफरान ने सिद्दीकी के इस सपने को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। जो उनकी असामयिक मृत्यु के कारण अधूरा रह गया।

फिल्मी हस्तियों से थे रसूख

सिद्दीकी का प्रभाव केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उन्होंने फिल्म उद्योग में भी गहरी छाप छोड़ी थी। वे संजय दत्त के पिता सुनील दत्त और अन्य बॉलीवुड हस्तियों के साथ करीबी संबंध रखते थे। उनका सबसे बड़ा योगदान तब सामने आया। जब उन्होंने सलमान खान और शाहरुख खान के बीच विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटना ने उन्हें राजनीति और मनोरंजन की दुनिया के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित कर दिया।

गांव लौटने का किया था वादा

2022 में अपनी अंतिम गांव यात्रा के दौरान सिद्दीकी ने महाराष्ट्र चुनावों के बाद फिर से गांव लौटने का वादा किया था। लेकिन उनका यह वादा अब अधूरा रह गया है। उनके पैतृक घर में आज भीड़ उमड़ रही है। जहां लोग उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

बाबा सिद्दीकी के भतीजे का कहना है कि जब हमने घटना के बारे में सुना तो हमें यकीन ही नहीं हुआ। अगर इतने बड़े नेता की गोली मारकर हत्या की जा सकती है तो आम लोगों की हालत क्या होगी। मैं दोषियों के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग करता हूं।

वहीं बाबा सिद्दीकी के पैतृक स्थान के एक निवासी का कहना है कि हमें कल रात 9 बजे के आसपास घटना के बारे में पता चला और हम सभी बहुत दुखी हैं। एक बड़े राजनेता की हत्या कर दी गई। यह महाराष्ट्र सरकार की विफलता है।

सिद्दीकी के प्रयासों ने विशेष रूप से शिक्षा और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में लोगों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। उनके निधन ने न केवल राजनीतिक क्षेत्र को बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया है। जो उनके कार्यों से प्रेरित था।

कबाड़ी के यहां काम करता था हत्यारा

उधर बाबा सिद्दीकी हत्याकांड आरोपियों में से एक की मां का कहना है कि वह पुणे में एक कबाड़ी के यहां काम करने गया था। मैं सिर्फ यही जानती थी। मुझे नहीं पता था कि वह मुंबई में क्या कर रहा था। होली में वह घर आया था। उसके बाद वह नहीं आया। वह मुझसे कॉल पर भी बात नहीं कर रहा था इसलिए मैं घटना के बारे में कुछ नहीं कह सकती।

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