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'99% शिवसैनिक' राज ठाकरे के साथ , क्या लाउडस्पीकर पर फंस गए हैं उद्धव ?

मुंबई, 5 मई: महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर का मुद्दा इतनी आसानी से शांत नहीं होता दिख रहा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार ने राणा दंपति के मामले को जिस तरीके से हैंडल किया, राज ठाकरे की वजह से वह खुद उसी में उलझ गई है। ठाकरे सरकार पर एमएनएस चीफ के मुद्दे पर बैकफुट पर होने के आरोप लग रहे हैं। ऊपर से शिवसेना का वह कार्यकर्ता जो इसके संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की नीतियों की वजह से इससे जुड़ा हुआ है, उसकी मायूसी भी बाहर आने लगी है। राज ठाकरे को कहीं ना कहीं जमीनी शिवसैनिकों की सहानुभूति मिल रही है और शायद इसी वजह से महा विकास अघाड़ी सरकार खासकर शिवसेना का माथा ठनक रहा है।

क्या लाउडस्पीकर पर फंस गए हैं उद्धव ?

क्या लाउडस्पीकर पर फंस गए हैं उद्धव ?

महाराष्ट्र के निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति निर्दलीय एमएलए रवि राणा ने मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी निवास 'मातोश्री' के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया, तो उन्हें जेल जाना पड़ा और उनके खिलाफ 'राजद्रोह' जैसी गंभीर धाराओं का इस्तेमाल किया गया। लेकिन, सीएम ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे ने बार-बार महा विकास अघाड़ी की सरकार को मस्जिदों से लाउडस्पीकर की आवाज बंद करवाने को लेकर अल्टीमेटम दिया है, तो भी उनपर हल्की धाराओं में एफआईआर की गई है। यही वजह है कि महाराष्ट्र में अब यह अटकलें लग रही हैं कि राज ठाकरे की राजनीति में उद्धव बुरी तरह से फंस गए हैं। दावा किया जा रहा है कि लाउडस्पीकर के मसले पर शिवसेना का जमीनी कार्यकर्ता राज ठाकरे से सहानुभूति रख रहा है।

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    राज ठाकरे पर सख्त कार्रवाई में हिचकिचाहट क्यों ?

    राज ठाकरे पर सख्त कार्रवाई में हिचकिचाहट क्यों ?

    मस्जिदों से लाउडस्पीकर की आवाज नहीं बंद होने की सूरत में उसके बाहर लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ने के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे की धमकी को देखते हुए राज्य की मशीनरी पूरी तरह से अलर्ट पर है। प्रदेश के पुलिस चीफ रजनीश सेठ ने मुलाजिमों को सख्त निर्देश दे रखा है कि किसी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि को रोकने के लिए कार्रवाई करें। लेकिन, औरंगाबाद में राज ठाकरे के भाषण के बाद उनके खिलाफ जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है, वह शिवसेना और उसके सुप्रीमो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अंदर की स्थिति की ओर इशारा कर रही है।

    उद्धव सरकार की मंशा पर विरोधी उठा रहे हैं सवाल

    उद्धव सरकार की मंशा पर विरोधी उठा रहे हैं सवाल

    महाराष्ट्र के औरंगाबाद में राज ठाकरे के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 116, 117 और 143 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लेकिन, विरोधियों का आरोप है कि यह बहुत ही हल्के हैं, जिसमें सार्वजनिक और गैर-कानूनी सभा के जरिए अपराध के लिए उकसाने जैसे आरोप हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के औरंगाबाद से सांसद इम्तियाज जमील ने कहा है, 'अजीब है कि नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा को हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया और राजद्रोह के तहत केस किया गया, जबकि राज पर ये धाराएं लगाई गई हैं, जबकि वह हिंसा की धमकी दे रहे हैं। '

    राज के बदले यह मुद्दा हमें उठाना चाहिए- शिवसैनिक

    राज के बदले यह मुद्दा हमें उठाना चाहिए- शिवसैनिक

    एमएनएस चीफ ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने और सड़कों पर मुसलमानों के नवाज पढ़ने से रोकने का जो मुद्दा उठाया है, वह दरसअल पहले खुद शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे खुद उठा चुके थे और शिवसेना के जमीनी कार्यकर्ता इस मुद्दे पर राज ठाकरे से असहमति जताने का कोई कारण नहीं समझ पा रहे हैं। गौरतलब है कि राज ठाकरे ने अपने दिवंगत चाचा का एक ऐसा ही वीडियो भी बुधवार को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। यही वजह है कि एमवीए सरकार खासकर शिवसेना इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। मुंबई के एक पूर्व शाखा प्रमुख को कोट करते हुए इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा है, 'हम असहमत कैसे हो सकते हैं? बालासाहेब हमेशा यही कहते रहे; राज के बदले यह मुद्दा हमें उठाना चाहिए।'

    '99% शिवसैनिक' राज ठाकरे के साथ !

    '99% शिवसैनिक' राज ठाकरे के साथ !

    शिवसेना के कुछ पदाधिकारियों का तो दावा है कि राज ठाकरे ने जो स्टैंड लिया है, उसके समर्थन में 99% हैं। शुरुआत में राज ठाकरे ही बाल ठाकरे के दाहिने हाथ हुआ करते थे। बाल ठाकरे की राजनीति के राज शुरू में स्वाभाविक उत्तराधिकारी माने जाते थे। ये बात अलग है कि पार्टी में ताजपोशी के वक्त उन्होंने बेटे उद्धव पर भरोसा किया। प्रदेश में भाजपा की बढ़त के बाद हाशिए पर चल रहे, राज को पहली बार ऐसा मुद्दा हाथ लगा है, जो शिवसेना की सियासत का आधार रहा है और जिसमें उनके चाचा ने ही उन्हें पारंगत बनाया था। इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए घर की चुनौती, विपक्षी बीजेपी से जरा भी कम नहीं रही है।

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